औषधीय गुणों से भरपूर है पलाश पत्तल दौने से लेकर यज्ञ हवन तक में बढ़ रही डिमांड*
By Shubh Bhaskar ·
26 Feb 2026 ·
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*औषधीय गुणों से भरपूर है पलाश पत्तल दौने से लेकर यज्ञ हवन तक में बढ़ रही डिमांड*
दैनिक शुभ भास्कर राजस्थान चित्तौड़गढ़ रामसिंह मीणा रघुनाथपुरा
बड़ीसादड़ी क्षेत्र में फाल्गुन की आहट के साथ ही प्रकृति ने अपना श्रृंगार बदल लिया है वनांचल और सड़कों के किनारों पर खिले पलाश खाकरा के फूल इन दिनों राहगीरों के आकर्षक का केंद्र बने हुए हुए हैं चिल चिलाती धूप के बीच केसरिया और लाल रंग की चादर ओढ़े ये वृक्ष ऐसे प्रतीत हो रहे हैं मानों जंगल में आग लगी हो यही कारण है कि लोग इन पेड़ों की सुंदरता को निहारने के लिए रुक रहे हैं और इस मनमोहक दृश्य को अपने कैमरों और सेल्फी में कैद कर रहे हैं
बच्चों में उत्साह परंपरा की और लौट रहे कदम आधुनिकता के दौर में जहां केमिकल युक्त रंगों का बोल बाला है वहीं बड़ीसादड़ी के ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और युवा पुरानी परंपराओं को जीवंत कर रहे
फूल से लेकर जड तक औषधीय खजाना*
जानकारों के अनुसार पलाश वृक्ष केवल सुंदरता ही नहीं बल्कि गुणों की खान भी है इसके विभिन्न उपयोग इसे विशेष बनाते हैं इसके फूलों से बना केसरिया रंग त्वचा को नुकसान नहीं पहुंचाता पलाश के पत्ते का उपयोग आज भी मांगलिक कार्यों में पत्तल और दौने बनाने केलिए किया जाता है इसके पेड़ से निकलने वाला गोंद क ई शारीरिक व्याधियों में औषधि के रुप में प्रयुक्त होता है फूल सूखने के बाद इसकी लकड़ियों का उपयोग यज्ञ और हवन में पवित्र समिधा के रूप में किया जाता है*
बच्चे टोकरियों में पलाश के फूल एकत्र कर रहे हैं इन फूलों को सुखाकर और पानी में उबालकर प्राकृतिक गुलाल और रग तैयार किए जा रहे हैं ग्रामीणों का कहना है कि यह रंग न केवल त्वचा केलिए सुरक्षित है बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है केमिकल के दौर में विरासत को बचाने की मुहिम बीते कुछ दशकों में बाजारु केमिकल रंगों ने पलाश की जगह ले ली है जिससे चमड़ी के रोग और एलर्जी की समस्याएं बढ़ी है ऐसे में बड़ीसादड़ी क्षेत्र में पलाश के प्रति बढ़ता रुझान एक सुखद संकेत है यह न केवल हमारी विरासत को संरक्षित कर रहा है बल्कि ईको फ्रेंडली होली के संदेश को भी जन जन तक पहुंचा रहा है