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शुभ व सत्कार्यों को नहीं, अशुभ कार्यों को कल पर टालो — *हरि चैतन्य पुरी महारा

By Shubh Bhaskar · 14 Feb 2026 · 5 views
शुभ व सत्कार्यों को नहीं, अशुभ कार्यों को कल पर टालो — *हरि चैतन्य पुरी महाराज*शुभ व सत्कार्यों को नहीं, अशुभ कार्यों को कल पर टालो — *हरि चैतन्य पुरी महाराज*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- काशीपुर,उत्तराखंड-गढीनेगी- संयुक्त ब्राह्मण समन्वय समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र चतुर्वेदी ने समिति के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को जानकारी देते हुए बताया की प्रेमावतार, युगदृष्टा, हरि कृपा पीठाधीश्वर एवं विश्व विख्यात संत स्वामी हरि चैतन्य पुरी महाराज ने श्री हरि कृपा धाम आश्रम में उपस्थित विशाल भक्त समुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को शुभ और सत्कार्यों को कभी कल पर नहीं टालना चाहिए, बल्कि यदि टालना हो तो अशुभ कार्यों को टालें।
अपने दिव्य प्रवचनों में महाराज श्री ने कहा कि सम्मान को जीवन का लक्ष्य नहीं बनाना चाहिए। यदि सम्मान को ही लक्ष्य बना लिया जाए तो थोड़ी-सी उपेक्षा भी व्यक्ति को विचलित कर देती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्य सोच-समझकर करना चाहिए। मित्रता, निर्णय और व्यवहार में विवेक आवश्यक है। क्रोध, अपमान, अनिष्ट या पापकर्म जैसे कार्यों में जितनी अधिक देर हो सके उतनी करनी चाहिए। किसी के अपराध पर शीघ्र दंड देने के बजाय गंभीर विचार करना चाहिए।
महाराज श्री ने कहा कि जो दूसरों को नुकसान पहुँचाता है, अंततः उसका स्वयं का ही नुकसान होता है। यदि कोई हमें हानि पहुँचाए तो हमें आक्रामक होने के बजाय बचाव और क्षमा का मार्ग अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षमा कायरों का नहीं, बल्कि वीरों का आभूषण है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मानव पर जगत और जगतपति दोनों का अधिकार है, किंतु मानव का इन पर अधिकार मानना अज्ञानता है। “जगत की चिंता जगतपति करें” कहते हुए उन्होंने समझाया कि यदि हम जगत को सुधारने में ही उलझे रहेंगे तो स्वयं का पतन हो सकता है। समाज सुधारक बनने से पहले समाज सेवक बनने का प्रयास करना चाहिए।
मानव जीवन की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने लिए त्यागपूर्वक, समाज के लिए उदारता से और परमात्मा के लिए आत्मीय प्रेम के साथ उपयोगी बन सकता है। शांत, उदार और प्रेमी भक्त बनना ही मानव जीवन की सच्ची उपलब्धि है।
महाराज श्री ने अधर्माचरण करने वाले कुमार्गगामी लोगों का संग त्यागकर, जितेंद्रिय एवं श्रेष्ठ महापुरुषों का संग और सेवा करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि सत्संग का प्रकाश हमारे अंतर्मन को आलोकित करता है, किंतु जब तक सत्य का संग नहीं होगा, तब तक सत्संग का पूर्ण लाभ नहीं मिल सकता। जैसे बंद खिड़कियों वाले घर में सूर्य की किरणें प्रवेश नहीं कर पातीं, वैसे ही जब तक हम गुरु और परमात्मा के ज्ञान को हृदय में धारण नहीं करेंगे, तब तक कृपा के अधिकारी नहीं बन सकते।
उन्होंने माता-पिता, गुरुजन, शास्त्र और संस्कृति के प्रति श्रद्धा रखने का आह्वान किया। संसार की हर वस्तु नश्वर है, परंतु परमात्मा का साथ कभी नहीं छूटता। अतः सेवा का अवसर मिलने पर स्वयं को सौभाग्यशाली समझना चाहिए और धर्म, संस्कृति, संतों एवं बुजुर्गों की सेवा का अवसर कभी नहीं गंवाना चाहिए।
महाराज श्री के दिव्य प्रवचनों को सुनकर उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो गए। स्थानीय, क्षेत्रीय एवं दूरदराज़ से हजारों भक्त श्री हरि कृपा धाम आश्रम, गढ़ीनेगी (काशीपुर) में दर्शन हेतु पहुंचे।
शनिवार प्रातः ०9 बजे श्रीरामचरितमानस पाठ प्रारंभ हुआ, जिसका समापन 15 फरवरी को प्रातः ०8:30 बजे होगा। प्रातः ०8 बजे श्री हरेश्वर महादेव का महाभिषेक किया जाएगा। प्रातः 10 बजे से ०1 बजे तक भजन-कीर्तन एवं महाराज श्री के प्रवचन होंगे तथा दोपहर ०1 बजे से ०4 बजे तक विशाल भंडारे की व्यवस्था की गई है।
रात्रि 12 बजे से ही श्री हरेश्वर महादेव पर जलाभिषेक के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं। कांवड़िये हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान को अर्पित करते हैं। मंदिर एवं श्री हरि कृपा धाम आश्रम को आकर्षक रूप से सजाया गया है।
आज भी दिनभर महाराज श्री के दर्शनों एवं अमृत वचनों को सुनने के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ते रहे। कांग्रेस व भाजपा सहित विभिन्न दलों के जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं क्षेत्र के गणमान्य नागरिक भी आशीर्वाद लेने पहुंचे।

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