कोटा में प्रज्ञाराम गोशाला में गोवंश की संख्या में भारी कमी, उठे कई सवाल।
By Shubh Bhaskar ·
13 Feb 2026 ·
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कोटा में प्रज्ञाराम गोशाला में गोवंश की संख्या में भारी कमी, उठे कई सवाल।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- कोटा- कोटा स्थित प्रज्ञाराम गोशाला में गोवंश की संख्या में अचानक आई भारी कमी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। हिंदू आस्था के प्रतीक माने जाने वाले गोवंश की सुरक्षा एवं संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर प्रश्न उठाए जा रहे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पशुपालन विभाग द्वारा प्रज्ञाराम गोशाला समिति को वर्ष 2025-2026 के प्रथम चरण में 90 दिनों के लिए 234 गोवंश के पालन हेतु ०9 लाख 51 हजार 750 रुपये का अनुदान दिया गया था। यह अनुदान अप्रैल, मई और जून 2025 के दौरान जारी किया गया था। इसके बाद गोशाला को कोई अतिरिक्त अनुदान प्राप्त नहीं हुआ।
मीडिया टीम द्वारा गोशाला का निरीक्षण करने पर मौके पर केवल 96 गोवंश ही पाए गए। इस प्रकार 234 में से 138 गोवंश कम पाए जाने से गोशाला संचालन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जब इस संबंध में गोशाला समिति से जानकारी ली गई तो समिति द्वारा गोवंश की वास्तविक संख्या को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा सकी।
इस मामले में जिला प्रशासन, पशुपालन विभाग एवं गोशाला समिति की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि गोशाला में 234 गोवंश रखे गए थे तो इतनी सीमित जगह में उनके लिए उचित आश्रय एवं व्यवस्था कैसे संभव थी। यदि अतिरिक्त स्थान उपलब्ध था तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।
गोवंश संरक्षण को लेकर संघर्ष कर रहे कोटा-बूंदी क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता मांगीलाल नागर ने आरोप लगाया कि गोशाला के टीन शेड सहित अन्य निर्माण कार्य चंदे से किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि समिति के पास पर्याप्त आर्थिक संसाधन उपलब्ध हैं तो उनका उपयोग गो सेवा में क्यों नहीं किया गया।
गोशाला प्रबंधन पर पहले भी साफ-सफाई और गोवंश को पर्याप्त चारा-पानी उपलब्ध नहीं कराने के आरोप लग चुके हैं। यह भी आरोप है कि कमजोर गोवंश को पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता, जिससे उनकी समय से पहले मृत्यु हो जाती है। साथ ही मृत गोवंश को समय पर नहीं हटाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
गोवंश संरक्षण को लेकर देश की राजनीति में भी समय-समय पर चर्चा होती रही है। वर्ष 2016 में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कथित गो-रक्षकों को लेकर विवादित बयान दिया था, जिस पर व्यापक बहस हुई थी। वहीं भारतीय जनता पार्टी पर भी विपक्ष एवं सामाजिक संगठनों द्वारा समय-समय पर गोवंश संरक्षण को लेकर सवाल उठाए जाते रहे हैं।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्यवाही की मांग की है, ताकि गोवंश संरक्षण और गोशाला संचालन की व्यवस्था पारदर्शी और प्रभावी बनाई जा सके।