पिपलुन्द की 1800 बीघा चारागाह बनी बदलाव की पहचान जहा कभी पानी नही टिकता था,अब 12 माह हरियाली व जल उपलब्ध
By Shubh Bhaskar ·
13 Feb 2026 ·
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पिपलुन्द की 1800 बीघा चारागाह बनी बदलाव की पहचान जहा कभी पानी नही टिकता था,अब 12 माह हरियाली व जल उपलब्ध
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
जहाजपुर-जहाजपुर के पिपलुन्द गाँव की करीब 1800 बीघा चारागाह भूमि ने कुछ ही वर्षो में ऐसा बदलाव देखा है जिसमे गाँव की पहचान ही बदल दी है।कुछ वर्ष पहले तक पूरी चारागाह भूमि विलायती बबूल की अधिकता के कारण नीलगायों का जमावड़ा रहता था और आस-पास की फसले नुकसान झेलती थी।इससे राहत पाने के लिए सरपंच वेदप्रकाश खटीक के नेतृत्व में वर्ष 2021 से 2022 में ग्रामीणों ने बबूल हटाने का निर्णय लिया।नीलामी से करीब 9.46 लाख रुपये की आय हुई और दो साल की मेहनत के बाद पूरी जमीन को साफ किया।चारागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया।खाली हुई भूमि पर बड़े स्तर पर पौधरोपण और जल संरक्षण कार्य किए गए।आज यहां करीब 78 हजार पौधे विकसित हो चुके है और 2.50 लाख बीजो का रोपण भी सफल रहा है। साथ ही संकन पोंड,नाडी और एनिकट सहित करीब 145 जल संरचनाएं बनाई गई,जिससे जलस्तर में सुधार हुआ।चारागाह क्षेत्र में अमृत सरोवर,वेद वाटिका,सरस्वती वाटिका और फल वाटिका का विकास हुआ है।भगवान देवनारायण मन्दिर के पास पंच फल उद्यान और बावड़ी का निर्माण भी जारी है।अब गाँव मे पशुओं के लिए चारो की कोई कमी नही है और हरियाली के कारण पर्यावरण भी संतुलित हुआ है।ग्रमीणों का कहना है कि पहले तो कांटेदार बबूल और सुखी जमीन थी,आज वहा हरियाली ,पानी और पशुपालन की नई संभावनाएं दिखाई दे रही है।करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यो के साथ पिपलुन्द कि चारागाह अब एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी है।पिपलुन्द ग्राम पंचायत ने चारागाह आधारित पशु आश्रय स्थल का अभिनय मॉडल विकसित किया है।यहा पशु खुले चारागाह में पेड़ो की छाया में रहते है,पास में बनी पशु खेली में पानी पीते है और पास ही बन रहे आश्रम स्थल में विश्राम करते है।
पंचायत का लेखा जोखा-जनसंख्या-10,000/-
साक्षरता-90%
कनेक्टिविटी-स्टेट हाइवे मोरला-त्रिवेणी पर स्थित ,बस व निजी साधन
मुख्यालय से दूरी-95 किमी