भारत–अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का ऐलाननामा, बताया किसान, एमएसपी और ग्रामीण अर्थव्य वस्था पर सीधा हमला
By Shubh Bhaskar ·
12 Feb 2026 ·
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भारत–अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ किसानों का ऐलाननामा, बताया किसान, एमएसपी और ग्रामीण अर्थव्य वस्था पर सीधा हमला
भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) और प्रगतिशील किसान जनमोर्चा का संयुक्त विरोध, राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर ट्रेड डील रद्द करने की मांग
ललितपुर।
भारत–अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ देशभर में किसान संगठनों का विरोध तेज होता जा रहा है। इसी क्रम में भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) एवं प्रगतिशील किसान जनमोर्चा, ललितपुर ने संयुक्त रूप से भारत–अमेरिका ट्रेड डील को किसान विरोधी बताते हुए इसके तत्काल निरस्तीकरण की मांग की है। किसान नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजकर चेतावनी दी है कि यदि इस समझौते को वापस नहीं लिया गया, तो किसान संगठन व्यापक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
किसान संगठनों का कहना है कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है और देश की लगभग 50 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में बिना किसानों की सहमति के किया गया यह व्यापार समझौता सीधे तौर पर किसानों के हितों के खिलाफ है। संगठनों ने आरोप लगाया कि अमेरिका की खेती भारी सब्सिडी, अत्याधुनिक मशीनों और बड़े कॉर्पोरेट फार्म मॉडल पर आधारित है, जबकि भारत में आज भी खेती छोटे और सीमांत किसानों के भरोसे चल रही है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यदि सोयाबीन, मक्का, गेहूं, डेयरी उत्पाद और दालों पर आयात शुल्क में कटौती की गई, तो सस्ती अमेरिकी उपज भारतीय बाजारों में भर जाएगी। इससे पहले से ही न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की लड़ाई लड़ रहे भारतीय किसान इस असमान प्रतिस्पर्धा में टिक नहीं पाएंगे।
किसान संगठनों ने डेयरी सेक्टर पर भी गंभीर खतरे की आशंका जताई है। उनका कहना है कि भारत का डेयरी मॉडल सहकारी व्यवस्था और छोटे दुग्ध उत्पादकों पर आधारित है, जबकि अमेरिकी डेयरी उत्पादों के खुले प्रवेश से लाखों ग्रामीण परिवारों की आजीविका पर सीधा प्रहार होगा। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए घातक साबित हो सकता है।
इसके अलावा, संगठनों ने एमएसपी, सार्वजनिक खरीद प्रणाली और खाद्य सुरक्षा पर खतरे का मुद्दा भी उठाया। उनका आरोप है कि ट्रेड डील के दबाव में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कमजोर करने और सरकारी खरीद घटाने का रास्ता तैयार किया जा रहा है, जिससे देश की खाद्य आत्मनिर्भरता पर संकट खड़ा हो जाएगा।
बीज और खेती पर कॉर्पोरेट नियंत्रण को लेकर भी किसानों ने चिंता जताई। ज्ञापन में कहा गया कि पेटेंट आधारित बीज प्रणाली से किसान अपनी पारंपरिक बीजों पर अधिकार खो देंगे और बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर निर्भर हो जाएंगे, जिससे उनकी स्वतंत्रता और स्वायत्तता खत्म हो जाएगी।
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह समझौता केवल व्यापार का मामला नहीं, बल्कि किसानों की आय, ग्रामीण रोजगार, खाद्य सुरक्षा और राष्ट्रीय आर्थिक संप्रभुता से जुड़ा सवाल है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि भारत–अमेरिका ट्रेड डील को तुरंत रद्द किया जाए, अन्यथा देशभर के किसान संगठनों को सड़क पर उतरकर आंदोलन तेज करना पड़ेगा।