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भारत में छुआछूत का सच बताया गौ पुत्र संत धर्म दास महाराज ने!

By Shubh Bhaskar · 06 Feb 2026 · 59 views
भारत में छुआछूत का सच बताया गौ पुत्र संत धर्म दास महाराज ने!

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- मथुरा- ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र संत धर्म दास महाराज ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को जानकारी देते हुए बताया कि भारत में छुआछूत और जातिगत व्यवस्था के इतिहास को लेकर अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि प्राचीन भारत में छुआछूत और जातिगत शोषण को लेकर कई भ्रांतियां फैलाई गई हैं, जिनकी ऐतिहासिक तथ्यों के आधार पर समीक्षा की जानी चाहिए।
गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने बताया कि वैदिक और प्राचीन भारत के उदाहरणों में समाज में योग्यता और कर्म को अधिक महत्व दिया जाता था। उन्होंने कहा कि सम्राट शांतनु ने मछुआरे की पुत्री सत्यवती से विवाह किया और उनके पुत्र के लिए भीष्म ने आजीवन ब्रह्मचर्य का व्रत लिया। महाभारत के रचयिता वेदव्यास को मछुआरे कुल से बताया जाता है, फिर भी वे महर्षि बने और गुरुकुल का संचालन किया। वहीं दासी पुत्र विदुर हस्तिनापुर के महामंत्री बने और उनकी ‘विदुर नीति’ आज भी राजनीति में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
उन्होंने आगे बताया कि महाभारत काल में भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया तथा भगवान श्रीकृष्ण का पालन-पोषण ग्वाल परिवार में हुआ। रामायण काल का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम के मित्र निषादराज थे तथा लव-कुश ने वनवासी महर्षि वाल्मीकि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की।
गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने महाजनपद और साम्राज्य काल का उदाहरण देते हुए कहा कि नन्द वंश, मौर्य वंश और गुप्त वंश के कई शासक विभिन्न सामाजिक वर्गों से आगे बढ़कर सम्राट बने। उनके अनुसार प्राचीन काल में समाज में कार्य के आधार पर व्यवस्था थी, जन्म के आधार पर नहीं।
उन्होंने मध्यकाल और मराठा काल का उल्लेख करते हुए कहा कि बाजीराव पेशवा ने गायकवाड़ और होलकर जैसे शासकों को सत्ता में स्थापित किया। साथ ही उन्होंने बताया कि संत रविदास और रामानंद जैसे संतों की परंपरा में सामाजिक समरसता दिखाई देती है।
गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने दावा किया कि मुगल और ब्रिटिश काल में कई सामाजिक कुरीतियों को बढ़ावा मिला। उन्होंने ब्रिटिश शासन की ‘बांटो और राज करो’ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों ने जातिगत भेदभाव को मजबूत किया। उन्होंने Nicholas Dirks की पुस्तक “Castes of Mind” का हवाला देते हुए कहा कि औपनिवेशिक शासन के दौरान जातिवाद को राजनीतिक रूप दिया गया।
उन्होंने कहा कि उनके अनुसार प्राचीन भारतीय समाज में योग्यता और कर्म को प्राथमिकता दी जाती थी तथा समाज में समरसता का भाव अधिक था।
यह जानकारी ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने गौ पुत्र नागपाल शर्मा सहित अनेक गौ पुत्रों को दी।

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