राष्ट्रीय सवर्ण दल राजस्थान इकाई ने यूजीसी सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन!
By Shubh Bhaskar ·
04 Feb 2026 ·
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राष्ट्रीय सवर्ण दल राजस्थान इकाई ने यूजीसी सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन!
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाडीअलवर):- राजगढ़- राष्ट्रीय सवर्ण दल राजस्थान प्रदेश इकाई द्वारा यूजीसी विनियम 2026 सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन प्रेषित किया गया। यह ज्ञापन तहसीलदार कल्याण साहब मीणा, तहसील राजगढ़ (अलवर) के माध्यम से भारत सरकार, नई दिल्ली को भेजा गया।
राष्ट्रीय सवर्ण दल का कहना है कि वर्तमान नीतियों के कारण सामान्य वर्ग के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिसे लेकर संगठन लंबे समय से आवाज उठा रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रपति के नाम यह मांग पत्र सौंपा गया।
*ज्ञापन में प्रमुख सात सूत्रीय मांगें इस प्रकार हैं*—
१.यूजीसी विनियम 2026 को तत्काल वापस लिया जाए।
२.वर्तमान राजनीतिक आरक्षण व्यवस्था में अनुसूचित जाति व जनजाति की आरक्षित सीटों पर सामान्य वर्ग को मतदाता होने के बावजूद चुनाव लड़ने की बाध्यता व स्वतंत्र मतदान अधिकार पर पुनर्विचार किया जाए।
३.राजनीतिक आरक्षण में सामान्य वर्ग को भी आरक्षित सीटों पर चुनाव लड़ने का अधिकार प्रदान किया जाए।
४.एसटी-एससी वर्ग को बिना किसी मापदंड व समय सीमा के दिए जा रहे निरंतर आरक्षण की समीक्षा की जाए।
५.एसटी-एससी एक्ट में बिना जांच गिरफ्तारी की व्यवस्था को असंवैधानिक बताते हुए इसकी समीक्षा की जाए।
६.जब अन्य वर्गों के लिए आयोग गठित हैं, तो सामान्य वर्ग आयोग का भी गठन किया जाए।
७.शिक्षा व स्वास्थ्य प्रत्येक नागरिक को समान रूप से निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएं तथा शिक्षा-स्वास्थ्य के व्यवसायीकरण पर रोक लगाई जाए।
ज्ञापन सौंपे जाने के अवसर पर राष्ट्रीय सवर्ण दल राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष बेनी प्रसाद लाटा, राष्ट्रीय समता पार्टी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष बाबा त्रिलोक तिवाडी, राष्ट्रीय सवर्ण दल राजस्थान के प्रदेश संरक्षक देशबंधु जोशी तथा आजाद मंच भारत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उपस्थित रहे।
इसके अलावा राजू भैया (मददगार),नागपाल शर्मा माचाड़ी, एडवोकेट व्यास, एडवोकेट पालीवाल, शाहिद सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के अनेक जागरूक नागरिकों ने हस्ताक्षर कर ज्ञापन का समर्थन किया।
संगठन ने मांग की कि केंद्र सरकार इन बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर शीघ्र न्यायसंगत निर्णय ले।