भाजपा नहीं तो फिर क्या? विकल्प तलाशते सवर्ण : *राना ठाकुर*
By Shubh Bhaskar ·
02 Feb 2026 ·
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भाजपा नहीं तो फिर क्या?
विकल्प तलाशते सवर्ण : *राना ठाकुर*
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-दिल्ली- दिल्ली एक बार फिर वही प्रश्न सियासी मैदान में गूंजने लगा है— भाजपा नहीं तो फिर क्या?
हालांकि अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूजीसी को लेकर अंतिम फैसला क्या होगा, लेकिन इसके बावजूद सवर्ण समाज के भीतर मंथन तेज हो गया है। राना ठाकुर ने आगाह करते हुए राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चौपाल शर्मा माचाड़ी को बताते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान तथाकथित विचारधाराओं के भेष में कुछ “कालीनेमी” तत्व घुसपैठ कर सकते हैं, जो पार्टी आलोचना की आड़ में आंदोलनों को कमजोर करने का प्रयास करेंगे।
आजाद मंच भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष राना ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2016 से भाजपा द्वारा सवर्ण समाज के विरुद्ध कानून बनाए जाने की प्रक्रिया शुरू हुई। वर्ष 2018 में एससी/एसटी एक्ट और अब यूजीसी जैसे कदमों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा की नीतियां सवर्ण विरोधी होती जा रही हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि इसके बावजूद भी भाजपा का समर्थन किया जाता है, तो आने वाली पीढ़ियों को क्या उत्तर दिया जाएगा?
राना ठाकुर ने कहा कि भाजपा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के मुद्दों पर सत्ता में आई, लेकिन यदि वही पार्टी उस वर्ग को समाप्त करने की दिशा में बढ़ती है, जो हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का सबसे सजग प्रहरी रहा है, तो यह कदम स्वयं भाजपा के लिए भी आत्मघाती सिद्ध होगा।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यही है— यदि भाजपा नहीं, तो फिर क्या? इसी संदर्भ में उन्होंने हिमाचल प्रदेश का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां तीसरे विकल्प के रूप में राष्ट्रीय देवभूमि पार्टी का उदय हुआ है। यदि अन्य राज्यों में भी ऐसे प्रयोग सफल होते हैं, तो यह संभव है कि स्वयं को अजेय समझने वाली पार्टियां मुश्किल में आ जाएं।
राना ठाकुर ने यह भी संकेत दिया कि आने वाले समय में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ने की पूरी संभावना है और राजनीति में नए विकल्प उभर सकते हैं।