टीकाराम जूली के पारिवारिक आयोजन से उठी सामाजिक पहल बनी मिसाल।
By Shubh Bhaskar ·
01 Feb 2026 ·
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टीकाराम जूली के पारिवारिक आयोजन से उठी सामाजिक पहल बनी मिसाल।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-अलवर-
राजस्थान की राजनीति में अपनी स्पष्टवादिता और सामाजिक सरोकारों के लिए पहचाने जाने वाले राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपनी बेटी के विवाह पूर्व आयोजित पारिवारिक कार्यक्रम को समाज के लिए एक प्रेरक संदेश में बदल दिया। अलवर के सागर रिसोर्ट में आयोजित यह आयोजन भव्यता या दिखावे के लिए नहीं, बल्कि विचारों की ऊँचाई और सामाजिक संवेदनशीलता के लिए याद किया जाएगा।
टीकाराम जूली ने आयोजन से पूर्व ही अपनी टीम को स्पष्ट निर्देश दे दिए थे कि इस पारिवारिक कार्यक्रम में कन्यादान की राशि अधिकतम एक सौ रुपये ही स्वीकार की जाएगी। इसमें किसी भी प्रकार का अपवाद नहीं होगा। चाहे आम कार्यकर्ता हो या प्रभावशाली नेता, गरीब हो या अमीर—सभी के लिए नियम समान रहेगा। सामाजिक अपेक्षाओं और वर्षों से चली आ रही परंपराओं के दबाव के बावजूद लिया गया यह निर्णय अपने आप में साहसिक था।
भारतीय समाज में विवाह से जुड़ी कन्यादान की परंपरा का भावनात्मक और धार्मिक महत्व रहा है, लेकिन समय के साथ यह कई बार दिखावे, आर्थिक दबाव और सामाजिक प्रतिस्पर्धा का माध्यम बनती चली गई है। बड़े लिफाफे, महंगे उपहार और “कितना दिया” जैसी चर्चाओं के बीच मूल भावना अक्सर गौण हो जाती है। जूली की इस पहल ने इसी मानसिकता को चुनौती दी।
कार्यक्रम के दिन सागर रिसोर्ट में हजारों लोग उपस्थित थे। कई लोग अपने सामर्थ्य के अनुसार अधिक कन्यादान देने की इच्छा लेकर आए, कुछ ने परंपरा का हवाला दिया तो कुछ ने सामाजिक प्रतिष्ठा की बात कही। बावजूद इसके, टीकाराम जूली के निर्देशों पर अमल करती उनकी टीम अपने निर्णय पर अडिग रही और अंततः सभी से अधिकतम एक सौ रुपये ही स्वीकार किए गए।
यह दृश्य अपने आप में असाधारण था। जहाँ आमतौर पर ऐसे आयोजनों में रकम और उपहार चर्चा का विषय होते हैं, वहाँ इस कार्यक्रम में विचार, संदेश और सामाजिक जिम्मेदारी केंद्र में रहे। उपस्थित लोगों ने न केवल इस निर्णय को सहजता से स्वीकार किया, बल्कि खुले मन से इसकी सराहना भी की।
टीकाराम जूली की यह पहल सिर्फ कन्यादान की राशि तक सीमित नहीं रही, बल्कि विवाह जैसे पवित्र संस्कार को आर्थिक प्रदर्शन से मुक्त रखने का एक सशक्त सामाजिक संदेश बनकर उभरी। यह आयोजन समाज के लिए एक मिसाल बन गया, जो आने वाले समय में अनेक परिवारों को सोचने और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित करेगा।