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शंकराचार्य जी के प्रस्थान पर शिष्य स्वामी शिवानंद महाराज से मिले गौ पुत्र धर्मेंद्र शास्त्री।

By Shubh Bhaskar · 30 Jan 2026 · 28 views
शंकराचार्य जी के प्रस्थान पर शिष्य स्वामी शिवानंद महाराज से मिले गौ पुत्र धर्मेंद्र शास्त्री।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- प्रयागराज-
ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन देशभर में निस्वार्थ भाव से चौबीसों घंटे गौ माताओं एवं सनातन धर्म की सेवा व रक्षा में निरंतर सक्रिय है। इसी क्रम में बुधवार, सायं लगभग ०5 बजे, जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज के प्रयागराज से प्रस्थान के अवसर पर संगठन के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष गौ पुत्र धर्मेंद्र शास्त्री ने शंकराचार्य जी के शिष्य स्वामी शिवानंद महाराज से भेंट कर विचार- विमर्श किया।
इस दौरान स्वामी शिवानंद महाराज ने अवगत कराया कि जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन को आशीर्वाद देते हुए कहा कि संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र धर्म दास महाराज द्वारा लिया गया संकल्प अवश्य पूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि चारों पीठों के शंकराचार्यों का आशीर्वाद गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के संकल्प के साथ है।
उन्होंने बताया कि आगामी 10 मार्च को दिल्ली में एक विशाल बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें केवल गौ माता को राष्ट्र माता घोषित कराने के उद्देश्य से निर्णायक रणनीति बनाई जाएगी। इसके लिए सभी गौ रक्षकों को संगठित होकर “गौ बचाओ अभियान” प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए।
स्वामी शिवानंद महाराज ने संगठन के गौ रक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि गौ पुत्र धर्मेंद्र शास्त्री के संगठन में एक से बढ़कर एक साहसी और समर्पित गौ रक्षक हैं। उन्होंने गोवर्धन से दिल्ली तक की पैदल यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अभियान में गौ पुत्र हरि राजपूत, गौ पुत्र जोगेंद्र सिंह चौधरी उर्फ कालू जाट, गौ पुत्र तीर्थ राज गर्ग सहित गौ पुत्र धर्म दास महाराज का योगदान प्रेरणादायक रहा।
स्वामी शिवानंद महाराज ने यह भी कहा कि भविष्य में जैसे ही कोई नई योजना बनेगी, संगठन को समय पर अवगत कराया जाएगा। उन्होंने गौ माता के लिए जीवन समर्पित करने पर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष का आभार व्यक्त किया। इसके पश्चात जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज प्रयागराज से प्रस्थान कर गए।
इस अवसर पर यह भी कहा गया कि यह अत्यंत दुखद है कि सनातनी परंपराओं वाले देश में ऐसी परिस्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं। अनशन समाप्त करने का कारण महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री सहित कई कार्यकर्ताओं की सड़क दुर्घटना में मृत्यु बताया गया।
वक्ताओं ने कहा कि संतों के लिए सर्व समाज सर्वोपरि होता है। संत निस्वार्थ होते हैं, उन्हें अपनी चिंता नहीं होती, वे केवल समाज और राष्ट्र के कल्याण की चिंता करते हैं।

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