यूजीसी के नए काले कानून पर सर्वोच्च न्यायालय की रोक का स्वागत, विरोध का संघर्ष जारी रहेगा : *देशबंधु जोशी*
By Shubh Bhaskar ·
29 Jan 2026 ·
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यूजीसी के नए काले कानून पर सर्वोच्च न्यायालय की रोक का स्वागत, विरोध का संघर्ष जारी रहेगा : *देशबंधु जोशी*
राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को सौंपा जाएगा ज्ञापन।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- जयपुर-
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नए सामाजिक विघटनकारी कानून पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा फिलहाल रोक लगाए जाने पर सामाजिक संगठनों एवं जागरूक नागरिकों ने संतोष व्यक्त किया है। राष्ट्रीय सवर्ण दल (रजि.) एवं भारत आज़ाद मंच (रजि.) के प्रदेश पदाधिकारियों ने इस निर्णय के लिए सर्वोच्च न्यायालय तथा याचिका दायर करने वाले सभी याचिकाकर्ताओं का कोटि-कोटि आभार प्रकट किया है।
इसी क्रम में जानकारी देते हुए देशबंधु जोशी,प्रदेश संरक्षक राष्ट्रीय सवर्ण दल राजस्थान एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भारत आज़ाद मंच राजस्थान प्रभारी ने श्रमजीवी पत्रकार संघ के तहसील उपाध्यक्ष नागपाल शर्मा माचाड़ी को बताया कि यूजीसी के इस काले कानून के विरोध में संघर्ष अभी जारी रहेगा।उन्होंने बताया कि 30 जनवरी को प्रातः 11 बजे जयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति एवं माननीय प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस कार्यक्रम में प्रदेश भर से समता-मूलक विचारधारा से जुड़े अनेक पदाधिकारी एवं संगठन साथी भाग लेंगे।
देशबंधु जोशी ने कहा कि भले ही न्यायालय से अस्थायी राहत मिली हो,लेकिन केंद्र सरकार एवं प्रमुख राजनीतिक दलों की इस विषय पर चुप्पी अत्यंत चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति के चलते ऐसे कानून लाए जा रहे हैं, जो भविष्य में सामाजिक विघटन और टकराव के बीज बो सकते हैं। इससे देश की एकता एवं अखंडता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी विशेषता “अनेकता में एकता” है, जिसे इस प्रकार के काले कानूनों द्वारा कलंकित किया जा रहा है। युवाओं के बीच भाईचारे को कमजोर करने का प्रयास किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। समाज के किसी भी वर्ग को गुलामी की ओर धकेलने के प्रयास बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे, और इसके विरुद्ध लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक संघर्ष निरंतर जारी रहेगा। अंत में उन्होंने समस्त जागरूक साथियों से अपील की कि वे समय से पूर्व जयपुर कलेक्ट्रेट पहुंचकर इस शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक आंदोलन को सफल बनाएं।