सीएम स्टालिन हिन्दी विरोध के चलते भाषा शहीद दिवस मना रहे हैं।
By Shubh Bhaskar ·
27 Jan 2026 ·
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सीएम स्टालिन हिन्दी विरोध के चलते भाषा शहीद दिवस मना रहे हैं।
सनातन धर्म और भारत को कमजोर करने वाली ताकतों को समझने की जरुरत।
सुनील कुमार मिश्रा बद्री दैनिक शुभ भास्कर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के.स्टालिन ने 25 जनवरी को भाषा शहीद दिवस मनाया। चेन्नई में आयोजित एक समारोह में स्टालिन ने उन व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने हिन्दी विरोधी अभियान में अपनी जान गवाई। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु में हिन्दी भाषा कभी नहीं थी और न ही भविष्य में होगी। हिन्दी से तमिलों का कोई सरोकार नहीं है। इस अवसर पर स्टालिन ने केंद्र सरकार पर तमिलनाडु में हिन्दी भाषा को थोपने का आरोप भी लगाया। स्टालिन ने ऐसा हिन्दी विरोधी रुख तब दिखाया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में काशी-तमिल संगमम करवा रहे है। पीएम मोदी का उद्देश्य काशी और तमिल के पुराने संबंधों को पुनजीर्वित करना है। इतिहास गवाह है कि तमिल विद्वानों ने सनातन संस्कृति के अनुरूप संस्कृत में अनेक पुस्तकें लिखी है जो यह दर्शाती है कि तमिल संस्कृति सनातन से जुड़ी है, इसलिए तमिल भाषा को संस्कृत की छोटी बहन माना जाता है। वर्ष 2022 से पीएम मोदी प्रतिवर्ष अपने निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी में काशी-तमिल संगमम का आयोजन करवा रहे है। इस समारोह का उद्देश्य दोनों संस्कृतियों को एकजुट रखना है। लेकिन वहीं तमिलनाडु के सीएम स्टालिन अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर विधानसभा चुनाव से पूर्व हिन्दी भाषा का विरोध करवा रहे है। ऐसा नहीं कि तमिल सनातन धर्म के विरोधी है, लेकिन स्टालिन जैसे नेता सनातन और भारत को कमजोर करने का काम कर रहे हैं। देश के लोगों को ऐसी सोच वालों को समझने की जरूरत है। अब जब बांग्लादेश में भी हिंदुओं के साथ अत्याचार हो रहे हैं, तब भारत में हिंदुओं के बीच एकजुटता की जरूरत है। ऐसे में स्टालिन जैसे नेताओं से सतर्क रहने की जरूरत है। यदि हिन्दी और तमिल भाषा के जानकार लोग एकजुट रहेंगे तो सनातन की भी रक्षा हो सकेगी। यदि भाषा की आड़ लेकर अलग रुख अपनाया गया तो सनातन संस्कृति को भी नुकसान होगा, जिसका खामियाजा देश को उठाना पड़ेगा। जहां तक स्टालिन का सवाल है तो उनके पुत्र और केबिनेट मंत्री उदयनिधि स्टालिन पहले ही सनातन का नष्ट करने की बात कह चुके हैं।