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स्वर्ण सामान्य वर्ग में यू जी सी को विषय बनाकर भ्रम उत्पन्न किया जा रहा यूजीसी राष्ट्रहित में जरूरी है सूबेदार मेजर रमेश सिंह शेखावत

By Shubh Bhaskar · 27 Jan 2026 · 28 views
स्वर्ण सामान्य वर्ग में यू जी सी को विषय बनाकर भ्रम उत्पन्न किया जा रहा

यूजीसी राष्ट्रहित में जरूरी है

सूबेदार मेजर रमेश सिंह शेखावत

सुनील कुमार मिश्रा (बद्री) दैनिक शुभ भास्कर हिंदुस्तान में आज विपक्ष का काम सिर्फ हिंदुओं को भ्रमित करके बांटना रह गया है क्योंकि उनको पता है कि हिंदू मतों का विभाजन होगा तभी उनकी सरकार आयेगी और वह अपनी मनमानी कर सकते हैं ।

हिंदुओं को ध्यान रखना चाहिए कि मोहम्मद गौरी 17 बार हार कर सिर्फ एक ही बार जीता था ?

UGC को विषय बनाकर जानबूझकर भ्रम उत्पन्न किया जा रहा है, भारतीय जनता पार्टी के अनेक सवर्ण समर्थकों को उद्देश्यपूर्वक भ्रांति की स्थिति में डाला जा रहा है यह सनातनी समाज को आपस में विभाजित करने का एक सुनियोजित प्रयास है। यदि भाजपा वास्तव में सवर्ण-विरोधी होती, तो क्या वह किसी सवर्ण को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाती? आज भी देश के अनेक महत्वपूर्ण और उत्तरदायित्वपूर्ण पदों पर सवर्ण समाज के लोग कार्यरत हैं।
देश की सेना का नेतृत्व, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष पद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पद शासन और नीति निर्धारण से जुड़े अनेक शीर्ष पद।

जब राष्ट्र की निर्णायक व्यवस्थाओं में सवर्णों की सक्रिय भागीदारी है, तो फिर भाजपा को सवर्ण-विरोधी कहना तर्क और तथ्य दोनों के विरुद्ध है।

जिस नरेंद्र मोदी जी को विश्व आज सशक्त नेतृत्व के रूप में देखता है, उसी मोदी जी ने सार्वजनिक मंच से एक सवर्ण को अपना मार्गदर्शक Boss कहा है, UGC Regulations को लेकर वास्तविक स्थिति पिछले कुछ दिनों से UGC Regulations के बहाने

मोदी जी और भाजपा को सवर्ण समाज का शत्रु सिद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है।
अब तथ्य समझिए

ये Regulations शैक्षणिक संस्थानों के लिए हैं, छात्रों के लिए नहीं।
UGC कोई दंड देने वाली संस्था नहीं है, न FIR दर्ज कर सकता है
न किसी को कारावास दे सकता है
न किसी पर आपराधिक प्रकरण चला सकता है, यदि किसी महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव की शिकायत होती है, तो UGC संबंधित संस्थान को कारण बताओ सूचना देता है, किसी छात्र को नहीं।

इन Regulations में किसी नई सज़ा का कोई प्रावधान नहीं है।

इन Regulations का वास्तविक उद्देश्य रैगिंग जैसी क्रूर प्रथा, शिकायतों के शीघ्र, निष्पक्ष और पारदर्शी निस्तारण हेतु समिति का गठन, ताकि छात्रों का ध्यान अध्ययन और ज्ञानार्जन पर केंद्रित रहे, न कि वैचारिक उन्माद पर।

यह भी स्मरणीय है कि
UGC अधिनियम 1956 से लागू है
समय-समय पर इसमें संशोधन होते रहे हैं और भविष्य में भी आवश्यक सुधार होते रहेंगे यह परिवर्तनीय व्यवस्था है।

क्या भविष्य में दूसरी पार्टी का सरकार बनेगी तो वो संशोधन नहीं करेगा???
समय समय पर संशोधन आवश्यक है

भारतीय जनता पार्टी में सवर्ण नेतृत्व पहले भी था और आज भी है।
योगी आदित्यनाथ,
राजनाथ सिंह,
और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष इसके स्पष्ट उदाहरण हैं।
इसके बाद भी यदि कोई यह मानता है कि भाजपा सवर्ण समाज या सनातनी समाज की विरोधी है,
तो वह तथ्यों से नहीं, पूर्वाग्रह से सोच रहा है।
अब ऐसे विचारों के सामने
सत्य प्रस्तुत करने के अतिरिक्त
और किया ही क्या जा सकता है।

स्वर्ण समाज के हित में :-
सूबेदार मेजर रमेश सिंह शेखावत
(सेना शिक्षा कोर )
संस्थापक आपजी आर्मी अकादमी भायली , वडोदरा , गुजरात।

सुनील कुमार मिश्रा (बद्री) दैनिक शुभ भास्कर हिंदुस्तान में आज विपक्ष का काम सिर्फ हिंदुओं को भ्रमित करके बांटना रह गया है क्योंकि उनको पता है कि हिंदू मतों का विभाजन होगा तभी उनकी सरकार आयेगी और वह अपनी मनमानी कर सकते हैं ।

हिंदुओं को ध्यान रखना चाहिए कि मोहम्मद गौरी 17 बार हार कर सिर्फ एक ही बार जीता था ?

UGC को विषय बनाकर जानबूझकर भ्रम उत्पन्न किया जा रहा है, भारतीय जनता पार्टी के अनेक सवर्ण समर्थकों को उद्देश्यपूर्वक भ्रांति की स्थिति में डाला जा रहा है यह सनातनी समाज को आपस में विभाजित करने का एक सुनियोजित प्रयास है। यदि भाजपा वास्तव में सवर्ण-विरोधी होती, तो क्या वह किसी सवर्ण को अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाती? आज भी देश के अनेक महत्वपूर्ण और उत्तरदायित्वपूर्ण पदों पर सवर्ण समाज के लोग कार्यरत हैं।
देश की सेना का नेतृत्व, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग का अध्यक्ष पद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पद शासन और नीति निर्धारण से जुड़े अनेक शीर्ष पद।

जब राष्ट्र की निर्णायक व्यवस्थाओं में सवर्णों की सक्रिय भागीदारी है, तो फिर भाजपा को सवर्ण-विरोधी कहना तर्क और तथ्य दोनों के विरुद्ध है।

जिस नरेंद्र मोदी जी को विश्व आज सशक्त नेतृत्व के रूप में देखता है, उसी मोदी जी ने सार्वजनिक मंच से एक सवर्ण को अपना मार्गदर्शक Boss कहा है, UGC Regulations को लेकर वास्तविक स्थिति पिछले कुछ दिनों से UGC Regulations के बहाने

मोदी जी और भाजपा को सवर्ण समाज का शत्रु सिद्ध करने का प्रयास किया जा रहा है।
अब तथ्य समझिए

ये Regulations शैक्षणिक संस्थानों के लिए हैं, छात्रों के लिए नहीं।
UGC कोई दंड देने वाली संस्था नहीं है, न FIR दर्ज कर सकता है
न किसी को कारावास दे सकता है
न किसी पर आपराधिक प्रकरण चला सकता है, यदि किसी महाविद्यालय या विश्वविद्यालय में जातिगत भेदभाव की शिकायत होती है, तो UGC संबंधित संस्थान को कारण बताओ सूचना देता है, किसी छात्र को नहीं।

इन Regulations में किसी नई सज़ा का कोई प्रावधान नहीं है।

इन Regulations का वास्तविक उद्देश्य रैगिंग जैसी क्रूर प्रथा, शिकायतों के शीघ्र, निष्पक्ष और पारदर्शी निस्तारण हेतु समिति का गठन, ताकि छात्रों का ध्यान अध्ययन और ज्ञानार्जन पर केंद्रित रहे, न कि वैचारिक उन्माद पर।

यह भी स्मरणीय है कि
UGC अधिनियम 1956 से लागू है
समय-समय पर इसमें संशोधन होते रहे हैं और भविष्य में भी आवश्यक सुधार होते रहेंगे यह परिवर्तनीय व्यवस्था है।

क्या भविष्य में दूसरी पार्टी का सरकार बनेगी तो वो संशोधन नहीं करेगा???
समय समय पर संशोधन आवश्यक है

भारतीय जनता पार्टी में सवर्ण नेतृत्व पहले भी था और आज भी है।
योगी आदित्यनाथ,
राजनाथ सिंह,
और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष इसके स्पष्ट उदाहरण हैं।
इसके बाद भी यदि कोई यह मानता है कि भाजपा सवर्ण समाज या सनातनी समाज की विरोधी है,
तो वह तथ्यों से नहीं, पूर्वाग्रह से सोच रहा है।
अब ऐसे विचारों के सामने
सत्य प्रस्तुत करने के अतिरिक्त
और किया ही क्या जा सकता है।

स्वर्ण समाज के हित में :-
सूबेदार मेजर रमेश सिंह शेखावत
(सेना शिक्षा कोर )
संस्थापक आपजी आर्मी अकादमी भायली , वडोदरा , गुजरात।

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