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स्नातक छात्रा के अपहरण का आरोप, 72 घंटे बाद भी बरामदगी नहीं हिंदू संगठनों में आक्रोश, राज्यपाल से की गई हस्तक्षेप की मांग

By Shubh Bhaskar · 23 Jan 2026 · 26 views
स्नातक छात्रा के अपहरण का आरोप, 72 घंटे बाद भी बरामदगी नहीं

हिंदू संगठनों में आक्रोश, राज्यपाल से की गई हस्तक्षेप की मांग


दैनिक शुभ भास्कर नीरज प्रजापति उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड उरई जालौन
कोंच नगर में एक स्नातक की छात्रा के कथित अपहरण का मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। आरोप है कि नगर के तिलक नगर मोहल्ला निवासी अरुण कुमार तिवारी की पुत्री कु० अनुष्का तिवारी, जो स्नातक की छात्रा है, को दिनांक 19 जनवरी 2026 को कुछ युवकों द्वारा बहला-फुसलाकर अज्ञात स्थान पर ले जाया गया। तीन दिन बीत जाने के बावजूद न तो छात्रा की बरामदगी हो सकी है और न ही आरोपियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई हुई है, जिससे परिजनों और समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।
इस पूरे मामले को लेकर सर्व हिन्दू समाज, कोंच के पदाधिकारियों ने राज्यपाल उत्तर प्रदेश को संबोधित एक शिकायती पत्र उपजिलाधिकारी कोंच के माध्यम से भेजा है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि समाजवादी पार्टी से जुड़े बताए जा रहे अराजक तत्व रिजवान मंसूरी उर्फ छोटू टाइगर एवं उसका एक साथी उस्मान कुरैशी इस घटना में शामिल हैं। संगठन का दावा है कि यह कृत्य पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत किया गया।
परिजनों का कहना है कि घटना की सूचना तत्काल स्थानीय पुलिस को दी गई थी, लेकिन 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद न तो छात्रा को बरामद किया गया और न ही आरोपियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की गई। आरोप यह भी लगाया गया है कि अराजक तत्वों द्वारा छात्रा पर दबाव बनाकर सोशल मीडिया पर बयानबाजी कराई जा रही है, जिससे परिवार की सामाजिक छवि को नुकसान पहुँच रहा है।
सर्व हिन्दू समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में भय का माहौल उत्पन्न कर रही हैं और यदि प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो अराजक तत्वों के हौसले और बुलंद होंगे। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि 24 घंटे के भीतर छात्रा की सकुशल बरामदगी कर दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई तो ब्राह्मण महासभा एवं अन्य सामाजिक संगठन आंदोलन करने को विवश होंगे, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मामले को लेकर कोंच क्षेत्र में चर्चाओं का दौर तेज है। लोगों का कहना है कि छात्रा की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस तरह के मामलों में त्वरित एवं निष्पक्ष कार्रवाई आवश्यक है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब देखना यह होगा कि राज्यपाल कार्यालय व जिला प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है और पीड़ित परिवार को कब न्याय मिलता है।

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