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वैभवशाली सांस्कृतिक विरासत से सदैव सीखने का कार्य करें - विभाग प्रचारक मनोज जी

By Shubh Bhaskar · 23 Jan 2026 · 252 views
वैभवशाली सांस्कृतिक विरासत से सदैव सीखने का कार्य करें - विभाग प्रचारक मनोज जी

दैनिक शुभ भास्कर नीरज प्रजापति उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड जालौन उरई नदीगाँव आज शताब्दी वर्ष के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्वावधान मे सकल हिन्दू समाज के सहयोग से गिद्धासा मंडल के नदीगाँव मे विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों की संख्या में समाज के बंधु उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग प्रचारक मनोज जी कर्णखेरा मंदिर के महंत पूज्य शंकर दास जी महाराज जिला सेवा प्रमुख श्रीमान विपिन जी एवं व्यवस्था प्रमुख मोहित जी द्वारा भारत माता के चित्र पर पुष्पांजलि तथा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
अपने उद्बोधन मे विभाग प्रचारक मनोज जी ने कहा हमारा देश भारत ऐसा देश है जिसे सोने की चिड़िया के नाम से पुकारे जाने का गौरव प्राप्त है क्योंकि यह भारत ही ऐसा देश है जहाँ के प्राकृतिक संसाधनों, सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक और आर्थिक दृष्टि से सम्पूर्ण विश्व मे समृद्ध राष्ट्र रहा है हमारे देश का स्वर्णिम इतिहास वैभवशाली संस्कृति, औपनिवेशिकि भारत की समृद्धि को बयां करती है भारत मे भोजन कपास रत्न विश्व की जो भी आवश्यकता थी भारत मे उपलब्ध थी
भारत मे गुरुकुलों के ज्ञान समृद्धशाली शिक्षण व्यवस्था का सम्पूर्ण विश्व लोहा मानता जब विश्व ज्ञान की चाह रखता था तब हमारे देश ने विश्व को उच्च स्तरीय शिक्षा पद्धति से परिचित करा दिया था मैकाले भारत आया वह यहाँ की शिक्षण व्यवस्था को देख हद प्रदेश हुआ और यहाँ से ज्ञानार्जन कर पश्चिमी शिक्षा व्यवस्था लागू करने का सफल प्रयास कर शिक्षा व्यवस्था मे बदलाव कर सांस्कृतिक विरासत को छिन्नभिन्न करने का कार्य किया।
उन्होंने कहा हिंदुओं को एकजुट होना होगा, तभी हमारी संस्कृति और धर्म बचेगा और भारत पुनः अपने उसी वैभव पर पहुचेगा उन्होंने कहा कि देश में कास्टवाद नहीं राष्ट्रवाद की जरूरत है। कहा कि जात-पांत की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई भाई एवं संस्कारों और संस्कृति का महत्व बताते हुए कहा कि आज के समय मे बच्चों को संपत्ति नहीं संस्कृति और संस्कार देने की आवश्यकता है।
व्यवस्था प्रमुख मोहित जी ने कहा हमे अपनी भाषा वेशभूषा खानपान घूमने के स्थान भारतीय संस्कृति के अनुकूल रखना चाहिये हमे अपने पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाना है देश के संसाधनों का उचित प्रयोग करना है विश्व के अंदर सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि कहीं है तो वह हमारे देश के पास है इसीलिये भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है हमें अपने खेतों मे अत्यधिक पेस्टीसाइट के उपयोग से बचना है
अंत मे सभी को पूज्य शरण दास जी महाराज का आशीर्वचन प्राप्त हुआ और सभी ने भारत माता की आरती की कार्यक्रम मे खण्ड कार्यवाह मानसिंह मोहित जी आशुतोष जी गोविन्द जी दौलत परिहार सहित मंडल के बंधु उपस्थित रहे।।

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