विश्वविद्यालयों में यूजीसी कानून सवर्ण छात्रों को शिक्षा से दूर करने का षड्यंत्र – *डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा*
By Shubh Bhaskar ·
23 Jan 2026 ·
13 views
विश्वविद्यालयों में यूजीसी कानून सवर्ण छात्रों को शिक्षा से दूर करने का षड्यंत्र – *डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा*
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- नई दिल्ली-डॉक्टर सुरेश चंद शर्मा ने अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को बताया कि 13 जनवरी 2026 से केंद्र सरकार के निर्देशन में देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रमोशन ऑफ इक्वलिटी इन हायर एजुकेशन एक्ट–2026 लागू कर दिया गया है। इस कानून को लेकर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुरेश चंद्र शर्मा ने कड़ा विरोध जताया है।
डॉ. शर्मा ने माननीय प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अवगत कराया कि यह कानून सवर्ण समाज के छात्रों को उच्च शिक्षा से दूर करने का एक दूरगामी षड्यंत्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि यूजीसी द्वारा भारत की संसदीय समिति एवं माननीय सर्वोच्च न्यायालय में इस कानून के समर्थन में फर्जी और भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं।
डॉ. शर्मा ने कहा कि वास्तविक स्थिति यह है कि देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में लगभग ०4 करोड़ 38 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, जबकि शैक्षणिक सत्र 2023-24 में मात्र 378 भेदभाव की शिकायतें दर्ज की गईं। यदि प्रतिशत के रूप में देखा जाए तो एक लाख छात्रों में एक छात्र ने भी शिकायत दर्ज नहीं कराई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि भेदभाव के नाम पर पेश की गई रिपोर्ट तथ्यहीन है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील करते हुए कहा कि भारत सरकार जातिगत आधार पर नीतियां बनाकर समाज में नफरत और असंतोष फैला रही है। ऐसे काले कानून को तुरंत प्रभाव से रोका जाए तथा देश में एकता बनाए रखने के लिए शिक्षण संस्थानों में जातिवादी राजनीति पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए।
डॉ. शर्मा ने यह भी चेतावनी दी कि यूजीसी के नए नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में तनाव और अशांति बढ़ाने का कारण बनेंगे। उन्होंने समस्त सवर्ण समाज से इस यूजीसी बिल का विरोध करने की अपील करते हुए कहा कि यदि समय रहते विरोध नहीं किया गया तो आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के अंधकारमय होने की पूरी जिम्मेदारी समाज की स्वयं की होगी।