दबंगों के आगे बेबस कानून न्यायालयी आदेश के बावजूद महिला की जमीन पर जबरन कब्जा, एसपी से गुहार
By Shubh Bhaskar ·
22 Jan 2026 ·
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दबंगों के आगे बेबस कानून
न्यायालयी आदेश के बावजूद महिला की जमीन पर जबरन कब्जा, एसपी से गुहार
दैनिक शुभ भास्कर उत्तर प्रदेश उरई (जालौन)
जालौन जिले में कानून व्यवस्था और पुलिस कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद दबंगों द्वारा एक महिला की भूमि पर जबरन कब्जा कर निर्माण कराए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
पीड़िता ने कोतवाली, उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक गुहार लगाई, लेकिन स्थानीय पुलिस पर दबंगों के दबाव में कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए आखिरकार पीड़िता को स्वयं पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचना पड़ा।
मामला ग्राम जोल्हूपुर परगना कालपी निवासी गीता देवी बेवा पत्नी स्व. बलवान सिंह से जुड़ा है। पीड़िता का कहना है कि वह मौजा छौक परगना कालपी स्थित गाटा संख्या 181 रकबा 2.84 की विधिवत मालिक और काबिज है। उक्त भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा था, जिसकी सुनवाई न्यायालय उपसंचालक चकबंदी उरई में हुई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद न्यायालय ने दिनांक 4 दिसंबर 2025 को स्पष्ट आदेश पारित करते हुए पीड़िता गीता देवी के पक्ष में निर्णय दिया।
न्यायालय के आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि मृतक कंधी सिंह का विवादित भूमि में कोई हिस्सा नहीं है और उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र रामकरन व अन्य का भी उक्त भूमि पर कोई अधिकार नहीं बनता। इतना ही नहीं, कंधी सिंह के पुत्रों से जमीन खरीदने वाले रामकुमार पुत्र राम संजीवन तिवारी निवासी रामगंज कालपी के पक्ष में किया गया बैनामा भी न्यायालय ने शून्य घोषित कर दिया।
इसके बावजूद पीड़िता का आरोप है कि रामकुमार और संजय राठौर निवासी गोपालगंज उरई ने खुलेआम दबंगई दिखाते हुए न्यायालयी आदेश की धज्जियां उड़ाईं और गाटा संख्या 181 पर जबरन कब्जा कर शटरिंग लगाकर निर्माण कार्य शुरू करा दिया। पीड़िता ने जब इसका विरोध किया तो दबंगों ने न केवल आदेश की प्रति फाड़कर फेंक दी, बल्कि जान से मारने की धमकी भी दी।
पीड़िता गीता देवी के अनुसार आरोपियों ने उसे धमकाते हुए कहा कि हमने तुम्हारे परिवार के दो लोगों को मार दिया है, फिर भी तुम नहीं मान रही हो। इस धमकी के बाद पीड़िता और उसका परिवार भय के साये में जीने को मजबूर है।
पीड़िता ने इस पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत उपजिलाधिकारी कालपी, क्षेत्राधिकारी कालपी और कोतवाली कालपी में दी। उपजिलाधिकारी और क्षेत्राधिकारी द्वारा कोतवाली को तत्काल कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि कोतवाली पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
आरोप है कि जब भी पीड़िता अपने पक्ष के कागजात लेकर कोतवाली प्रभारी कालपी के पास जाती है, तो उसे बेइज्जत कर भगा दिया जाता है।
पीड़िता का कहना है कि दबंगों की पहुंच और दबाव के चलते पुलिस खुलकर कार्रवाई नहीं कर रही है।
न्याय न मिलने से आहत होकर पीड़िता आखिरकार पुलिस अधीक्षक जालौन दुर्गेश कुमार के कार्यालय पहुंची और पूरी आपबीती सुनाई।
पीड़िता ने बताया कि पुलिस अधीक्षक ने पूरे मामले को गंभीरता से सुना और उसे न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
पीड़िता गीता देवी ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि न्यायालय के आदेश के अनुसार तत्काल निर्माण कार्य रोका जाए, दबंगों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए और उसे व उसके परिवार को सुरक्षा प्रदान की जाए।
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब न्यायालय के आदेश भी दबंगों के आगे बेअसर हो जाएं और पीड़ित को थाने से ही दुत्कार दिया जाए, तो आम नागरिक न्याय की उम्मीद आखिर किससे करे?
अब सबकी निगाहें पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप पर टिकी हैं कि क्या पीड़िता को वास्तव में न्याय मिल पाएगा या दबंगों का दबदबा यूं ही कानून पर भारी पड़ता रहेगा।