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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की छवि खराब करना चाहते हैं

By Shubh Bhaskar · 21 Jan 2026 · 100 views
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की छवि खराब करना चाहते हैं


सुनील कुमार मिश्रा बद्री दैनिक शुभ भास्कर उत्तर प्रदेश के प्रयागराज संगम के माघ मेला प्राधिकरण ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा है। असल में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को ज्योतिर्मठ का शंकराचार्य होने का दावा कर प्रयागराज में माघ मेले के दौरान हंगामा कर रहे हैं। अपने शाही रथ पर बैठकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं। अविमुक्तेश्वरानंद को समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का समर्थन भी मिल गया है। माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद के शाही रथ को संगम तट तक ले जाने से इंकार कर दिया है। यही वजह है कि अब प्रशासन और अविमुक्तेश्वरानंद के बीच प्रतिदिन टकराव हो रहा है। अविमुक्तेश्वरानंद सनातन धर्म की मर्यादा भूलकर एक अपराधी जैसा बर्ताव कर रहे हैं। अब जब शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया है तो अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि उनका शंकराचार्य के पद पर पट्टाभिषेक हुआ है, उन्होंने प्राधिकरण से नोटिस को वापस लेने की मांग की है। इसके साथ ही धमकी दी है कि यदि नोटिस वापस नहीं लिया गया तो प्राधिकरण के खिलाफ कोर्ट की शरण ली जाएगी। इस धमकी के बाद टकराव और बढ़ गया है।

अविमुक्तेश्वरानंद के ज्योतिर्मठ का असली शंकराचार्य होने पर सवाल उठाया था। असल में दिवंगत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने अपने जीवनकाल में किसी को भी उत्तराधिकारी घोषित नहीं किया, लेकिन अविमुक्तेश्वरानंद ने शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के निधन के तुरंत बाद स्वयं को उत्तराधिकारी बता कर शंकराचार्य पद पर कब्जा कर लिया। दिवंगत शंकराचार्य के परम शिष्य स्वामी प्रज्ञानानंद महाराज ने बताया कि ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य पद का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में अविमुक्तेश्वरानंद स्वयं को शंकराचार्य होने का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद पद ज्योतिर्मठ के कोष में वित्तीय अनियमितताएं करने के आरोप भी लगाए है। उन्होंने कहा कि माघ मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को जो नोटिस दिया है, वह सही है।

तो देशभर में प्रदर्शन होता:
यदि अविमुक्तेश्वरानंद असली शंकराचार्य होते तो अब तक देशभर में विरोध हो जाता। देश के सनातनियों को भी पता है कि अविमुक्तेश्वरानंद ज्योतिर्मठ के असली शंकराचार्य नहीं है। इस समय प्रयागराज में गंगा नदी के किनारे प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धालुओं पर भी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के भाषणों का कोई असर नहीं हो रहा है। अधिकांश श्रद्धालु प्राधिकरण के निर्णय को सही बता रहे है। श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर करोड़ों की भीड़ के बीच अविमुक्तेश्वरानंद का रथ गुजरता तो हादसा हो सकता था। जब माघ मेले में आए श्रद्धालुओं की ही अविमुक्तेश्वरानंद के प्रति कोई सहानुभूति नहीं है तो फिर वे किस बात के शंकराचार्य है? असल में अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वयं ही अपनी पोल खोल दी है। सपा और कांग्रेस के नेताओं का समर्थन बताता है कि अविमुक्तेश्वरानंद का एजेंडा क्या है? वे माघ मेले में सिर्फ योगी सरकार की छवि खराब करना चाहते हैं। लेकिन स्वामी अविमुक्तानंद जी की छवि खराब हो गई है

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