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अलवर शहर में तथाकथित गाय पालक की क्रूरता, गर्भवती गाय को लावारिस छोड़ा।

By Shubh Bhaskar · 12 Jan 2026 · 37 views
अलवर शहर में तथाकथित गाय पालक की क्रूरता, गर्भवती गाय को लावारिस छोड़ा।

प्रसव पीड़ा में अत्यधिक ब्लीडिंग से तड़पती रही गाय, समय पर मदद से बची जान।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- अलवर- अलवर शहर में तथाकथित गाय पालकों की लापरवाही और क्रूरता लगातार बढ़ती जा रही है। ये लोग गायों से अंतिम बूंद तक दूध निकालने के बाद उन्हें सड़कों पर लावारिस छोड़ देते हैं, जिससे न केवल गायों पर अत्याचार होता है,बल्कि आमजन की जान भी खतरे में पड़ती है। अब तक सड़कों पर छोड़ी गई गायों के कारण कई लोग घायल हो चुके हैं और कुछ को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है, लेकिन संबंधित विभागों की व प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं की गई है।
गाय का धार्मिक,सांस्कृतिक, आर्थिक और पर्यावरणीय महत्व सर्वविदित है। इसे ‘गौ माता’ कहकर पूजनीय माना जाता है। यह पवित्रता और समृद्धि का प्रतीक है, लेकिन अलवर जिले के कुछ गाय पालक इन भावनाओं को ठेस पहुंचाते हुए निरंतर क्रूरता कर रहे हैं।
शनिवार को एसएमडी सर्किल के पास एक लावारिस गर्भवती गाय ने सड़क पर ही एक बछड़े को जन्म दिया। दुर्भाग्यवश, बछड़े का सिर पहले निकलने के बजाय पैर निकलने से गाय को अत्यधिक ब्लीडिंग होने लगी और वह असहनीय पीड़ा में तड़पती रही। इस नाजुक स्थिति में विहिप कार्यकर्ता लोकेश हिंदू, पशु एम्बुलेंस कर्मचारी, विहिप माधव प्रखंड अध्यक्ष नरेश शर्मा तथा शहर के कवि प्रवेन्द्र पंडित मौके पर पहुंचे। नगर परिषद के कर्मचारी हेतराम और राहुल ने भी तत्परता दिखाते हुए जच्चा-बच्चा को संभाला और सुरक्षित प्रसव में सहयोग किया।
जीव विज्ञान के जानकार जानते हैं कि प्रसव पीड़ा अत्यंत असहनीय होती है, जिसे कई बार एक साथ अनेक हड्डियों के टूटने के बराबर बताया जाता है। बावजूद इसके, गाय पालक ने जानबूझकर इस गर्भवती गाय को लावारिस छोड़ दिया,जबकि शारीरिक बदलाव देखकर उसे यह भली-भांति ज्ञात था कि गाय को अकेला छोड़ना उसे मौत के मुंह में धकेलने जैसा है।विहिप और पशु एम्बुलेंस कर्मचारियों की तत्परता से जच्चा-बच्चा सुरक्षित हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि ऐसे कथित गोपालकों के खिलाफ प्रशासन कब सख्त कार्यवाही करेगा, ताकि भविष्य में कोई और बेजुबान इस तरह की पीड़ा का शिकार न बने। अलवर जिले की संपादक श्रीवास्तव ने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री का हवाला देते हुए बताया कि गोद में गाय के बछड़े को लेकर फोटो खिंचाने से गो सेवा नहीं होती है। इनकी जान बचाने और रक्षा करने से गौ सेवा मानी जाती है। अतः आपसे निवेदन है कि गौमाता को गौ राष्ट्र माता घोषित करें और इन्हें बूचढ़ खाने बंद कर गौमाता को कटने से बचाएं।

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