ShubhBhaskar
SHUBHBHASKAR
E Paper

केसीसी ऋण में बड़ा फर्जीवाड़ा: 25 किसानों पर मुकदमे के आदेश, बैंक अधिकारियों व दलालों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

By Shubh Bhaskar · 10 Jan 2026 · 16 views
केसीसी ऋण में बड़ा फर्जीवाड़ा: 25 किसानों पर मुकदमे के आदेश, बैंक अधिकारियों व दलालों की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

दैनिक शुभ भास्कर उत्तर प्रदेश गोण्डा कर्नलगंज, भारतीय स्टेट बैंक की कर्नलगंज शाखा से जुड़े किसान क्रेडिट कार्ड केसीसी ऋण प्रकरण में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। बैंक अधिकारियों को कथित रूप से गुमराह कर दोबारा ऋण लेने के आरोप में 25 किसानों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश तो न्यायालय ने दिया है, लेकिन इस पूरे प्रकरण में बैंक शाखा के जिम्मेदार अधिकारियों, फील्ड ऑफिसरों और दलालों की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बैंक प्रबंधक के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन चतुर्थ महिमा चौधरी ने कोतवाली कर्नलगंज के प्रभारी निरीक्षक को 15 दिन के भीतर मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। शाखा प्रबंधक ने न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर ग्राम छपरतल्ला निवासी शिव प्रसाद, ग्राम भदैंया के पप्पू, नरायनपुर कला के अवध पाल सिंह व उनके भाई उमाशंकर सिंह, धर्मपुर के राजेंद्र सिंह व उनकी पत्नी रामराजी, प्रतापपुर के राम प्रताप सिंह, उनकी पत्नी प्रभा देवी व छोटकू, राजपुर के सतेंद्र, माधवपुर के राजकुमार, धमसड़ा के संतोष कुमार, जयराम जोत के दीपनरायन, बसेरिया की मालती देवी व सरजू सिंह, दानापुर के निरंजन, बखरिया के बजरंग प्रसाद, मुण्डेरवा के आनंद कुमार, पिपरी माझा के रामवासी, सेहरिया कला के रामलखन और उनकी मां मुन्नी देवी, झौनहा ज्वाला प्रसाद, नरायनपुर माझा के रामसूरत, ग्राम सुमेरपुर सिकरी के रहने वाली गायत्री देवी और उनके पुत्र अरविंद कुमार के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने का आदेश देने की याचना की। बताया गया कि किसानों ने कथित रूप से गलत शपथ पत्र देकर दोबारा केसीसी ऋण प्राप्त किया और बाद में ऋण की अदायगी नहीं की। बैंक प्रबंधक के प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए अपर सिविल जज जूनियर डिवीजन चतुर्थ महिमा चौधरी ने कोतवाली कर्नलगंज के प्रभारी निरीक्षक को 15 दिन के भीतर मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। हालांकि, सूत्रों का दावा है कि मामला केवल किसानों तक सीमित नहीं है। इस पूरे फर्जीवाड़े में बैंक शाखा के कुछ फील्ड ऑफिसर, शाखा प्रबंधन और बिचौलियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर कमीशन लेकर फर्जी ऋण स्वीकृत किए गए। आरोप है कि जरूरतमंद और गरीब किसानों, जो कमीशन देने में सक्षम नहीं थे, उनके ऋण आवेदन महीनों तक लंबित रखे जाते हैं और उन्हें बार-बार बैंक के चक्कर लगवाए जाते हैं और अंततः आवेदन पत्रावली अस्वीकृत दिखाकर उन्हें परेशान किया जाता है। सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में बिना समुचित जांच-पड़ताल के फर्जी नोड्यूज प्रमाण पत्र के आधार पर ऋण स्वीकृत किए गए, जिससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि ऋण वितरण प्रक्रिया में बैंक के अंदरूनी तंत्र की भी अहम भूमिका रही है। जानकारों का कहना है कि यदि बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता नहीं होती तो इस तरह बड़े पैमाने पर गलत शपथ पत्रों के आधार पर ऋण स्वीकृत होना संभव नहीं था। स्थानीय लोगों और बैंकिंग जानकारों का आरोप है कि बैंक के जिम्मेदार अधिकारी खुद को बचाने की मंशा से केवल किसानों को आरोपी बनाकर मुकदमा दर्ज करा रहे हैं, जबकि असली साजिशकर्ता—दलाल, फील्ड ऑफिसर और शाखा के जिम्मेदार अधिकारी अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं। प्रकरण में यह भी सवाल उठ रहा है कि जब ऋण स्वीकृति के समय सभी दस्तावेजों की जांच बैंक स्तर पर होती है, तो फिर फर्जीवाड़ा कैसे पकड़ में नहीं आया। ऐसे में निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि किसानों के साथ-साथ बैंक के जिम्मेदार अधिकारियों, दलालों और फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों को भी मुकदमे में शामिल किया जा सके। अब देखना यह होगा कि पुलिस विवेचना में केवल किसानों पर कार्रवाई होती है या फिर इस पूरे केसीसी ऋण घोटाले की परतें खोलते हुए बैंक तंत्र में बैठे जिम्मेदारों तक भी कानून का शिकंजा पहुंचता है।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube