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प्रयागराज नाट्य समारोह में नाटक हंस गीत तथा मां मुझे टैगोर बना दो का शानदार मंचन संपन्न

By Shubh Bhaskar · 05 Jan 2026 · 40 views
प्रयागराज नाट्य समारोह में नाटक हंस गीत तथा मां मुझे टैगोर बना दो का शानदार मंचन संपन्न


सुनील कुमार मिश्रा दैनिक शुभ भास्कर उत्तर प्रदेश प्रयागराज।आज उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में तीन दिवसीय प्रयागराज नाट्य समारोह का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा एवं संस्कार भारती काशी प्रांत के संगठन मंत्री दीपक शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया । संस्था के उपाध्यक्ष चित्रकार रवीन्द्र कुशवाहा सचिव सुशील कुमार राय एवं अविचल द्विवेदी ने स्मृति चिन्ह एवं अंग वस्त्र से अतिथियों का स्वागत किया। संचालन योगेंद्र मिश्रा विश्वबंधु ने किया । आयोजन साइंटिफिक एंपावरमेंट एंड डेवलपमेंट ऑफ़ सोसाइटी प्रयागराज का रहा। समारोह की प्रथम संध्या में दो नाटकों हंस गीत तथा मां मुझे टैगोर बना दे का मंचन हुआ। प्रथम प्रस्तुति हंस गीत का मंचन समन्वय रंग मंडल के कलाकारों द्वारा किया गया कहानी प्रसिद्ध रूसी कहानीकार एंटन चेखोव की कहानी का नाट्य रूपांतरण हरिप्रिया कथा तथा नाट्य विस्तार, परिकल्पना एवं निर्देशन सुषमा शर्मा का रहा। कहानी हंसगीत जहां रंगकर्मी शिवकांत अपने जीवन संघर्ष को दर्शकों के सामने व्यक्त करत है युवा शिवाकांत की भूमिका में चंकी बच्चन और उनकी प्रेमिका शालिनी की भूमिका में सोनम सिंह ने प्रभाव छोड़ा। प्रॉम्पटर हरिचरन की भूमिका में विजय अहिरवार ने मुख्य कलाकार शिवकांत का साथ बखूबी दिया युवा रंग कर्मियों की भूमिका में दीपक दीपेंद्र सिंह और राहुल अर्णव रायरहे। पार्श्व मंच में प्रशांत वर्मा का पार्श्व संगीत, परिकल्पना टोनी सिंह, वस्त्र विन्यास मीना उरांव, रूप सज्जा हामिद, मंच सामग्री अर्णव राय तथा दीपेंद्र सिंह तथा मंच निर्माण विजय अहिरवार तथा चंकी बच्चन का रहा । हंस गीत के शानदार निर्देशन में निर्देशिका सुषमा शर्मा सफल रहीं।
दूसरी प्रस्तुति में मां मुझे टैगोर बना दे पंजाबी कहानीकार स्वर्गीय मोहन भंडारी की मेनू टैगोर बना दे पर आधारित है यह कहानी एक मजदूर के बच्चे के जीवन पर आधारित है जो शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहा है वह टैगोर के साहित्य से प्रेरित हो टैगोर जैसा कवि बनना चाहता है। अंत में वह एक शिक्षक बनके अपने गांव के बच्चों को शिक्षित करता है तथा उन्हें टैगोर व अब्दुल कलाम बनने की प्रेरणा देता है। नाटक के निर्देशक व एकल अभिनेता लकी गुप्ता का यह 1769वां शो व मंचन था जिसका दर्शकों ने जोरदार तालियों से अभिनंदन किया।

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