०5 साल में गरीबी से हुए अमीर! सवाल यह है – पैसा आया कहाँ से?
By Shubh Bhaskar ·
04 Jan 2026 ·
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०5 साल में गरीबी से हुए अमीर!
सवाल यह है – पैसा आया कहाँ से?
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- अलवर- पिछले पाँच वर्षों में गाँव-कस्बों की राजनीति में एक बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव देखने को मिला है। जो लोग कभी सरपंची व प्रधानी का चुनाव लड़ने के लिए भी आर्थिक रूप से कमजोर माने जाते थे, आज वही लोग आलीशान मकानों, महंगी गाड़ियों और मजबूत बैंक बैलेंस के साथ समृद्ध जीवन जीते नजर आ रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा आम है। कि चुनाव के समय जिन प्रत्याशियों के पास न पर्याप्त संसाधन थे, न कोई बड़ा व्यवसाय, सत्ता मिलने के बाद उनकी जीवनशैली अचानक कैसे बदल गई। सवाल सीधा है—क्या केवल पाँच वर्षों में इतनी ईमानदार कमाई संभव है, जितनी एक आम व्यक्ति पूरी जिंदगी में भी नहीं कर पाता?
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार की अधिकांश योजनाएँ गरीब और जरूरतमंद वर्ग के लिए बनाई गई थीं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका लाभ सीमित लोगों तक ही सिमट कर रह गया। सड़क,नाली,आवास योजना,शौचालय,राशन वितरण और मनरेगा जैसे कार्यों में गुणवत्ता की कमी और “कट” की चर्चाएँ लगातार सामने आती रही हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार कई विकास कार्य डिपार्मेंट के अधिकारियों व नेताओं की मिली भगत से कागजों में पूरे दिखाए जाते हैं,जबकि वास्तविकता में अधूरे या घटिया निर्माण दिखाई देते हैं। इसके बावजूद कुछ जनप्रतिनिधियों की संपत्ति में तेजी से वृद्धि होना कई सवाल खड़े करता है।
यह लेख किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि उस सोच पर सवाल उठाने के लिए है, जिसमें जनसेवा के पद को कमाई का साधन समझ लिया गया है। आज आवश्यकता है कि जनता जागरूक होकर सवाल पूछे, जवाब मांगे और पारदर्शिता सुनिश्चित करे।
यदि समय रहते सवाल नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में वही स्थिति दोहराई जाएगी और फिर पाँच साल बाद यही पूछा जाएगा—
“इतना पैसा आखिर आया कहाँ से?”
सरपंची व प्रधानी सेवा का माध्यम है,निजी संपत्ति बढ़ाने का नहीं। जनता की जागरूकता ही स्वच्छ और ईमानदार ग्राम प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत है।