सिलारी में तीन दिवसीय ‘भुआसा - बाईसाराज स्नेह मिलन समारोह’ का भव्य आयोजन
By Shubh Bhaskar ·
14 Jun 2026 ·
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सिलारी में तीन दिवसीय ‘भुआसा - बाईसाराज स्नेह मिलन समारोह’ का भव्य आयोजन
पीपाड शहर - समीपवर्ती ग्राम सिलारी में चौहान परिवार द्वारा तीन दिवसीय भव्य "भुआसा - बाईसाराज स्नेह मिलन समारोह" का आयोजन किया गया। 12 से 14 जून तक चले इस अनूठे कार्यक्रम में चौहान परिवार की बहनों, बेटियों एवं भुआसाओं ने अपूर्व उत्साह के साथ भाग लिया। दूर-दराज के गांवों से आईं 72 से अधिक बहन-बेटियों की गरिमामयी उपस्थिति ने चौहान परिवार के इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।समारोह के पहले दिन सिलारी पहुंचने पर शाम को सभी आई हुई बहन-बेटियों को चौहान परिवार द्वारा गाजे-बाजे, पारंपरिक लवाजमे के साथ, रीति-रिवाजों, कुमकुम तिलक, तलवार द्वार, पुष्पवर्षा और स्वागत गीतों के साथ अभिनंदन किया गया। जगह-जगह पुष्प वर्षा कर बेटियों का पलक-पावड़े बिछाकर चुनरी ओढ़ाकर स्वागत किया। शाम को श्रद्धा एवं भक्ति के माहौल में प्राचीन ठाकुरजी के मंदिर में जागरण का आयोजन हुआ।13 जून सुबह के सत्र में गांव के देव स्थानों, झुंझार व सतीयों के स्थानों पर बहनों एवं बेटियों को दर्शन करवाए। गांव के ही दयालसिंह चौहान द्वारा ठिकाना सिलारी व गांव के सभी ऐतिहासिक तथा धार्मिक स्थानों के इतिहास के बारे में बताया गया। इसके पश्चात खेजड़ला स्थित भैंसांद माता मंदिर में दर्शन हेतु सभी गए। शाम को महिलाओं और बच्चों के लिए मनोरंजक खेलकूद प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं, जिनमें म्यूजिकल चेयर, रस्साकशी आदि में सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस यात्रा ने विवाहित बेटियों को उनके बचपन की यादों से जोड़ दिया। इसी रात आयोजित सांस्कृतिक संध्या में राजस्थान की शान 'घूमर नृत्य' की मनमोहक प्रस्तुति ने उपस्थित परिवारजनों का मन मोह लिया।समारोह के अंतिम दिन परिवार के बुजुर्गों व भाइयों ने सभी बहन-बेटियों को सीख देकर सामूहिक फोटो सत्र के बाद उन्हें अश्रुपूरित आंखों से भावभीनी विदाई दी।कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए चौहान परिवार ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य लक्ष्य हमारी बहन-बेटियों और उनके परिवारों के बीच आपसी प्रेम, स्नेह और सामाजिक एकता को मजबूत करना तथा नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली संस्कृति, रिश्तों और संस्कारों से जोड़ना था। सभी ने संकल्प लिया की भले ही यह कार्यक्रम औपचारिक रूप से समाप्त हो रहा है, लेकिन यहाँ से शुरू हुआ मेल मिलाप, भाईचारे और सामाजिक एकता का सिलसिला निरंतर जारी रहना चाहिए।