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ज्ञान, प्रेम और भक्ति का संगम है ब्रह्म ज्ञान। ब्रह्म ज्ञान द्वारा ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है।

By Shubh Bhaskar · 01 Jan 2026 · 28 views
ज्ञान, प्रेम और भक्ति का संगम है ब्रह्म ज्ञान।

ब्रह्म ज्ञान द्वारा ही परमात्मा की प्राप्ति संभव है।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):-राजगढ़- संत निरंकारी सत्संग भवन राजगढ़ पर धौलपुर से आए ज्ञान प्रचारक महात्मा मनोहरलाल की अध्यक्षता में अंग्रेजी नव वर्ष मनाया गया। इस अवसर संगत को संबोधित करते हुए अपने वचनों में कहा गुरु के अनुसार चलना ही गुरुमति है वरना तो इस संसार में आए हुए व्यक्ति बिना भक्ति के पशु समान है। आत्मा का परमात्मा से मिलान होना ही सच्ची भक्ति है । माया रुपी इस संसार में मनुष्य अनेक बुराइयों से युक्त होता है लेकिन जब इस निरंकार के साथ आत्मसात होकर इस ब्रह्म ज्ञान को जीवन में अपनाता है तो जीवन भी सफल हो जाता है। संतो के संग से ही निरंकार की प्राप्ति होती है। जब हम इस विशाल परमात्मा से जुड़ जाते हैं तो फिर कोई बंधन शेष नहीं रहता। सत्संग में उपस्थित संत महात्माओं, श्रद्धालुओं ने अपने गीतों, कविताओं एवं विचारों के माध्यम से निरंकार प्रभु परमात्मा का सुंदर गुणगान किया।
अंत में अंग्रेजी नववर्ष के अवसर पर सभी के लिए मंगल कामना करते हुए यही आशीर्वाद दिया कि इस अंग्रेजी नववर्ष में हम सभी का जीवन सेवा सिमरण और सत्संग से सजा रहे सत्संग का आयोजन मुखी महात्मा राम अवतार के दिशा निर्देश एवं सेवादल संचालक मनोहर लाल की देखरेख में संपन्न हुआ। मंच संचालन भूपेंद्र द्वारा किया गया। अंग्रेजी नव वर्ष इसलिए कहा गया है क्योंकि हिंदू नव वर्ष चैत्र नवरात्रों में आता है।

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