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चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है मेवाड़ का हरिद्वार - मातृकुंडिया*

By Shubh Bhaskar · 15 Apr 2026 · 6 views
*चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित है मेवाड़ का हरिद्वार - मातृकुंडिया*


दैनिक शुभ भास्कर राजस्थान चित्तौड़गढ़ कैलाश चंद्र सेरसिया

मातृकुंडिया तीर्थ जिले की राशमी तहसील के हरनाथपुरा पंचायत में स्थित है। जो उपखंड मुख्यालय से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मान्यता है कि यह वहीं जगह है, जहां भगवान परशुराम अपनी मां की हत्या के पाप से मुक्त हुए थे । यहां पर भगवान परशुराम ने शिव जी की तपस्या कर और फिर शिव जी के कहे अनुसार मातृकुंडिया के जल में स्नान करने से उनके पाप धुल गया अर्थात भगवान परशुराम ने पाप से मुक्ति पाई इसी कारण इस स्थान को मातृकुंडिया कहा जाने लगा । मातृकुंडिया का अर्थ माता के पाप से मुक्ति देने वाला कुंड, जो मातृकुंडिया बनास नदी पर स्थित है । यहां पर एक प्राचीन कुंड है। इस कुंड के पानी से स्नान करने पर, जाने अनजाने में हुए पाप से मुक्ति मिलती है। इस कुंड में मेवाड़ के लोगों द्वारा अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन भी किया जाता है । जो लोग अपने पूर्वजों की अस्थि को हरिद्वार नहीं ले जा सकते वह मातृकुंडिया में ही अस्थि का विसर्जन करते हैं । इसीलिए इस स्थान को मेवाड़ का हरिद्वार भी कहा जाता है । मंदिर के महंत द्वारा बताया मंदिर का निर्माण मेवाड़ के महाराणा स्वरूप सिंह ने करवाया था ।


*यहां है मंगलेश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर*

वैसे तो मातृकुंडिया में बहुत सारे मंदिर स्थित हैं पर उनमें से सबसे प्रमुख मंदिर मंगलेश्वर महादेव का मंदिर है । मंदिर के महंत के अनुसार इस मंदिर का निर्माण मेवाड़ के महाराणा स्वरूप सिंह जी द्वारा करवाया गया था । भगवान शिव के अलावा हनुमान जी और जीवित समाधि लेने वाले बाबा का समाधि स्थल भी स्थित है। यहां पर छोटे-बड़े 25 से अधिक मंदिर हैं । अलग - अलग समाज जनों द्वारा बनाई गई 30 से अधिक धर्मशालाएं स्थित है। यहां पर स्नान करने के लिए अनेक घाट का निर्माण करवाया गया है । सबसे प्रमुख परशुराम घाट है । घाट के पास ही तैली समाज द्वारा निर्मित लक्ष्मण झूला स्थित है , जिससे कुंड के एक छौर से दूसरे छौर पर आया जाता है , वहीं तीर्थ स्थल पर एक बाजार स्थित है, जो चूड़ियों और खिलौनों के लिए प्रसिद्ध हैं । यह मंदिर देवस्थान विभाग उदयपुर के अधीन आता है । विभाग द्वारा शिवरात्रि के अवसर पर पूजा अर्चना, जलाभिषेक का व्यापक प्रबंध किया जाता है। मंगलेश्वर महादेव के नाम से राजस्व रिकॉर्ड में काफी भूमियां स्थित है। विभाग की उदासीनता के चलते अभी अन्य लोगों के कब्जे में है ।


*राजस्थान में 52 गेट वाला बांध*


मातृकुंडिया बांध चित्तौड़गढ़ व राजसमंद जिले की सीमा पर स्थित है, लेकिन यह चित्तौड़गढ़ में आता है । मातृकुंडिया बांध बनास नदी पर स्थित है । राजसमंद में स्थित नंद संमद बांध के भर जाने पर मातृकुंडिया बांध में इसका पानी आता है। मातृकुंडिया बांध में पानी की आवक राजसमंद जिले से होती है। बांध की भराव क्षमता 28 फिट है । इस बांध का निर्माण 1981 में पूर्ण हुआ था। बांध का जल ग्रहण क्षेत्र 3485 वर्ग किलोमीटर है, लंबाई 8400 मीटर है। इस बांध में 52 गेट हैं, जो राजस्थान के किसी भी बांध में नहीं है अर्थात सर्वाधिक गेट वाला बांध है । मातृकुंडिया बांध भरने पर यहां से मेजा फीडर भीलवाड़ा के जरिए पानी मेजा बांध लाया जाता है । मेजा बांध के भरने से भीलवाड़ा जिले में राहत मिलती है । मातृकुंडिया बांध की भराव क्षमता पूरी होने पर राज्य सरकार के नियमानुसार बांध से 213 एमसीएफटी हिन्दुस्तान जिंक, 170 एमसीएफटी रेलमगरा के लिए तथा 50 एमसीएफटी पानी बनास नदी में छोड़ा जाता है। कुल 433 एमसीएफटी बांध में रिजर्व रखा जाता है। उसके बाद शेष पानी मेजा फीडर में छोड़ा जाता है। मातृकुंडिया से मेजा बांध भीलवाड़ा की दूरी 58 किलामीटर है।

*परशुराम पैनोरमा*

प्रदेश के चित्तौड़गढ़ जिले में मातृकुंडिया यह वही जगह है जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। इसी बात को ध्यान में रखकर परशुराम पेनोरमा का निर्माण करने की योजना बनी। अप्रैल 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने मातृकुंडिया में भगवान परशुराम पेनोरमा का शिलान्यास किया था। भगवान परशुराम के जीवन चरित्र को दर्शाने के लिए करोड़ों की लागत से इस पेनोरमा को बनाया गया है । भगवान परशुराम से संबंधित चित्र और पेंटिंग्स को भी यहां लगाया गया है ।

*महाराजा सूरजमल की भव्य मूर्ति*

मात्र कुंडिया में जाट समाज द्वारा 18वीं सदी के महान हिंदू योद्धा और भरतपुर के शासक महाराजा सूरजमल जी की भव्य प्रतिमा स्थापित की गई है। यह प्रतिमा मात्र कुंडिया बस स्टैंड के समीप स्थापित है, जिसे 'जाटों का प्लेटो' कहे जाने वाले वीर योद्धा के सम्मान में लगाया गया है । इसका अनावरण तत्कालीन उपराष्ट्रपति महामहिम जगदीप धनकड़ द्वारा किया गया था । यह प्रतिमा समाज की मजबूती और एकता के प्रतीक के रूप में स्थापित की गई है।

*वर्ष भर होते है सामाजिक एवं धार्मिक आयोजन*

मातृकुंडिया में विभिन्न समाजों के मंदिर स्थित होने से वर्ष पर्यंत विभिन्न प्रकार के धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों का आयोजन होता रहता है । सामुहिक विवाह सम्मेलनों का भी आयोजन के साथ विभिन्न प्रकार की क्रिडा प्रतियोगिताएं का भी आयोजन किया जाता है।

*अस्थि विसर्जन के लिए रोज दूरदराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं*

मेवाड़ के हरिद्वार के नाम से विख्यात होने से यहां पर वर्ष पर्यंत प्रतिदिन कई श्रद्धालु अपने पूर्वजो की अस्थियां लेकर पहुंचते हैं , और श्राद्ध, तर्पण, अस्थि विसर्जन, प्रसादी आदि का कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इस प्रकार वर्ष पर्यंत श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

*परशुराम महादेव गुफा मंदिर*

मातृकुण्डिया से कुछ मील की दूरी पर ही परशुराम महादेव मंदिर स्थित है। मान्यता है कि इसका निर्माण स्वयं भगवान परशुराम ने पहाड़ी काटकर किया था। इस पहाड़ी को उन्होंने भगवान शिव से प्राप्त फरसे से काटा था। परशुराम महादेव गुफा को मेवाड़ का अमरनाथ भी कहा जाता हैं।

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