समता, न्याय और संविधान के शिल्पी बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर गूंजा सामाजिक न्याय का संदेश।
By Shubh Bhaskar ·
14 Apr 2026 ·
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समता, न्याय और संविधान के शिल्पी बाबा साहेब की 135वीं जयंती पर गूंजा सामाजिक न्याय का संदेश।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- आगरा- भारत के संविधान निर्माता एवं सामाजिक न्याय के महान अग्रदूत डॉ. भीमराव अंबेडकर जी की 135वीं जयंती के अवसर पर शहर में श्रद्धा और सम्मान के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर बाबा साहेब को नमन किया गया।
कार्यक्रम में वरिष्ठ नेता उपेंद्र सिंह ने बाबा साहेब के योगदान को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने अपने पूरे जीवन में समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के अधिकार, सम्मान और समानता के लिए संघर्ष किया। उनके प्रयासों से ही देश को एक सशक्त संविधान मिला, जिसने हर नागरिक को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व का अधिकार प्रदान किया।
उपेंद्र सिंह ने कहा कि बाबा साहेब ने केवल दलित वर्ग के लिए ही नहीं, बल्कि हर वर्ग के अधिकार और सम्मान की बात की। उन्होंने महिलाओं के सशक्तिकरण में उनके योगदान को रेखांकित करते हुए बताया कि हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को संपत्ति और समान अधिकार दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की गई। वहीं संविधान के अनुच्छेद 17 के जरिए अस्पृश्यता को समाप्त करने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में बाबा साहेब का योगदान अतुलनीय है और इसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाएं शिक्षा, रोजगार, सामाजिक कल्याण और महिला सशक्तिकरण के माध्यम से उनके सपनों को साकार करने की दिशा में कार्य कर रही हैं।
इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशन में आगरा में बन रहे वर्ल्ड क्लास बुद्धा पार्क का उल्लेख करते हुए इसे भगवान बुद्ध और बाबा साहेब के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराही जा रही है और इसके निर्माण से पहले ही कई देशों के पर्यटक आकर्षित हो रहे हैं।
उपेंद्र सिंह ने केंद्र सरकार द्वारा बाबा साहेब से जुड़े पांच प्रमुख स्थलों को “पंचतीर्थ” के रूप में विकसित किए जाने का भी उल्लेख किया। इसमें महू (जन्मस्थली), नागपुर (दीक्षाभूमि), मुंबई (चैत्यभूमि), लंदन स्थित उनका निवास और दिल्ली का परिनिर्वाण स्थल शामिल हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि हम बाबा साहेब के संवैधानिक आदर्शों को आत्मसात करते हुए एक समतामूलक, शिक्षित, संगठित और प्रगतिशील भारत के निर्माण में अपना योगदान दें।