ShubhBhaskar
SHUBHBHASKAR
E Paper

शाहपुरा में साहित्यिक गोष्ठी व भाषा सम्मेलन सम्पन्न

By Shubh Bhaskar · 30 Dec 2025 · 9 views
शाहपुरा में साहित्यिक गोष्ठी व भाषा सम्मेलन सम्पन्न

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा-अखिल भारतीय साहित्य परिषद इकाई शाहपुरा द्वारा मधुकर भवन संघ कार्यालय में मासिक साहित्यिक गोष्ठी व भाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में माँ भारती की तस्वीर पर विभाग संयोजक रामप्रसाद माणमिया, आशुतोष सिंह सौदा और तेजपाल उपाध्याय ने माल्यार्पण किया। डॉ परमेश्वर कुमावत 'परम' ने 'भारती की लोक मंगल साधना साकार हो' परिषद गीत से गोष्ठी की शुरुआत हुई। भँवर 'भड़ाका' ने 'आँचल नारी जात का गहना है।' कविता के माध्यम से आधुनिक नारी के पहनावे में लुप्त होते आँचल और छोटे पहनावे पर व्यंग्य प्रहार किया।विष्णु दत्त शर्मा 'विकल' ने उर्दू भाषा का प्रतिनिधित्व करते हुए गजल के शेर सुनाए 'खून-ए-दिल भी माफ कर देते अगर, बेवफाई का सलीका निभाया होता।
ऐ दोस्त तुम भी मुझे गम दिये जाते हो, मुझको रुसवा हरदम किए जाते हो' शेर सुनकर गोष्ठी को गजलमय कर दिया। गोपाल पंचोली ने 'रोड पर दो व्यक्ति जोर-जोर से आपस में लड़ रहे थे' कविता सुनाकर ओछी मानसिकता वाले लोगों पर व्यंग्य प्रहार किया। ओम माली 'अंगारा' ने 'निश्छल भाव से पोषण करती सबका, पर हम निज कर्तव्य क्यों भूल जाते हैं, स्वार्थ वशीभूत विनाश-अश्व पर आरूढ़, जिससे जीवन पाते उसी को मिटाते हैं' कविता सुनाकर प्रकृति का विनाश कर रहे स्वार्थी मनुष्यों की स्वार्थ लोलुपता पर करारी चोट की। सी. ए. अशोक बोहरा ने 'दिल की दीवार पे लिखा तेरा ही नाम है, बस तुझे पा लूँ यही अरमान है।' गजल सुनाकर मन के भावों की अभिव्यक्ति की। डॉ परमेश्वर कुमावत 'परम' ने संस्कृत श्लोक सुनाकर संस्कृत भाषा का प्रतिनिधित्व किया और राजस्थानी गीत 'कमली धूम मचाती आई रे, कॉपी म' नम्बर या छोरी जीरो ल्याई रे।' सुनाकर सभी का मन मोह लिया। एडवोकेट दीपक पारीक ने महाभारत के अभिमन्यु प्रसंग पर 'चक्रव्यूह गवाह है कि लड़ने वाला साधारण नहीं होगा' अभिमन्यु के असाधारण युद्ध कौशल पर कविता सुनाकर गोष्ठी को ओजमय कर दिया। सिंधी भाषा का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ पत्रकार मूलचंद पेसवानी ने 'सिंधी बोली अमर रहन्दी, माटी जंई महक वहन्दी' रचना सुनाकर की।डॉ कमलेश पाराशर ने 'सनातन बचा लो आज यही काम है, धरा को बचा लो यह सब का काम है।' कविता सुनाकर सनातन संस्कृति को बचाने का आह्वान किया। बालकृष्ण जोशी 'बीरा' ने 'वन्दनीय अमर रहेगा वीरों का बलिदान, गाकर गगन गुंजा दिया वन्दे मातरम गान।' और राजस्थानी गीत 'म्हूँ मनड़े मुळकती जाऊँ तू गीत मांडतो जा' सुनाकर गोष्ठी को संगीतमय कर दिया। जयदेव जोशी ने यजुर्वेद के श्लोक सुनाकर वैदिक संस्कृत का प्रतिनिधित्व किया और अतिभावातिरेक और अतिसंवेदनशील रचना 'रक्ताक्षर बांग्ला भूमि- धूप की जगह धुआँ उतर आया, पद्मा की लहरों में लहू का कम्पन है।' सुनाकर बांग्लादेश में हो रहे हिन्दू नर संहार पर मन की पीड़ा और व्यथा को व्यक्त करते हुए भावुक हो गए। आशुतोष सिंह सौदा ने ओजमयी रचना 'ए मेवाड़ी गौरव गाथा अगणित अभिनंदन तुझको, ए मेवाड़ी शौर्य पताका बार-बार वंदन तुझको।' कविता सुनाकर मेवाड़ की गौरव गाथा और इतिहास में हुए कृष्णा जहर कांड को रेखांकित किया। संस्था के अध्यक्ष तेजपाल उपाध्याय ने 'सर्दी भी देखो कैसा करती है पक्षपात, अमीरों के लिए लाती है खुशियों की सौगात, गरीबों पर करती है वज्रपात।' कविता सुनाकर ठंड से ठिठुरते गरीब लोगों का दर्द बयां किया और समाज में व्याप्त असमानता पर करारा प्रहार किया। गोष्ठी के अंत में रामप्रसाद माणमिया विभाग संयोजक ने 'त्याग तपस्या देशभक्ति का जगती वंदन करती है, कोटि नमन इस पावन रज को यह बलिदानी धरती है।' शाहपुरा की बलिदानी धरती और बारहठ परिवार के बलिदान को नमन किया।
मुख्य अतिथि रामप्रसाद माणमिया और कार्यक्रम की अध्यक्षता तेजपाल उपाध्याय ने तथा गोष्ठी की विवेचना एडवोकेट दीपक पारीक ने की। अगले माह होने वाली गोष्ठी का विषय गणतंत्र या आजादी निश्चित किया गया।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube