सुरों के संगम से गूँजा टहला: बच्चों ने ‘भारत’ को आइडल मानकर रची अपनी धुनें।
By Shubh Bhaskar ·
03 Apr 2026 ·
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सुरों के संगम से गूँजा टहला: बच्चों ने ‘भारत’ को आइडल मानकर रची अपनी धुनें।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-टहला-
अलवर जिले के ग्रामीण प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने और उनकी रचनात्मकता को नई दिशा देने के उद्देश्य से रोप फाउंडेशन द्वारा ‘समझो तो’ कार्यक्रम के तहत एक भव्य ‘म्यूजिक अड्डा’ का आयोजन किया गया। इस अनूठी कार्यशाला में संगीत को माध्यम बनाकर बच्चों को अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने और सृजन की कला सीखने का अवसर मिला।
कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि छात्र-छात्राओं ने किसी प्रचलित फिल्मी गीत की नकल करने के बजाय ‘भारत’ को अपना आदर्श मानते हुए स्वयं की मौलिक धुनें और गीत तैयार किए। बच्चों की रचनाओं में देशभक्ति, संस्कृति और समाज के प्रति उनके विचारों की झलक साफ दिखाई दी।
दिल्ली से आए CYC (कम्युनिटी) के संगीत विशेषज्ञ दीपांशु, यशवंत और सभी ने बच्चों को संगीत निर्माण की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने सुर-ताल के संतुलन, लय की समझ और विभिन्न वाद्ययंत्रों के उपयोग की तकनीकों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया, जिससे बच्चों में संगीत के प्रति आत्मविश्वास और रुचि बढ़ी।
रोप फाउंडेशन के प्रोग्राम मैनेजर अमित कुमार शर्मा ने बताया कि यह पहल बच्चों के भीतर छिपी भावनाओं को उजागर करने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे अपने विचार शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते, लेकिन संगीत के जरिए वे अपनी पहचान बना सकते हैं।
इस आयोजन में आसपास के विभिन्न गांवों से सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। कार्यक्रम को सफल बनाने में रोप फाउंडेशन टीम के सोनू सैनी, दिनेश और सुरेश बलाई का विशेष योगदान रहा।
इस सामूहिक प्रयास ने टहला क्षेत्र में कला और रचनात्मकता का एक नया अध्याय जोड़ते हुए बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का एक सशक्त मंच प्रदान किया।