किसानों को न केवल ' उत्पादक ' होना चाहिए बल्कि सफल ' उद्यमी ' भी होना चाहिए। -विपणन मंत्री जयकुमार रावल · विश्व की सर्वश्रेष्ठ बाजार प्रणाली वधान के निकट स्थापित की जाएगी।
By Shubh Bhaskar ·
30 Mar 2026 ·
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किसानों को न केवल ' उत्पादक ' होना चाहिए बल्कि सफल ' उद्यमी ' भी होना चाहिए।
-विपणन मंत्री जयकुमार रावल
· विश्व की सर्वश्रेष्ठ बाजार प्रणाली वधान के निकट स्थापित की जाएगी।
दैनिक शुभ भास्कर दिव्या सोहनलाल जोशी
महाराष्ट्र मुंबई, बदलते हालात में किसान को सिर्फ उत्पादक बनकर नहीं रहना चाहिए , बल्कि एक कुशल उद्यमी भी बनना चाहिए। इसके लिए विपणन विभाग आवश्यक कदम उठा रहा है। विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि कृषि उत्पादों के उत्पादन के साथ-साथ किसानों को विपणन, ब्रांडिंग , पैकेजिंग और बिक्री के सभी पहलुओं में भाग लेना चाहिए । उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रक्रिया में किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों के हित में एक आंदोलन का सृजन होगा ।
यशवंतराव चव्हाण केंद्र में महाराष्ट्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड और महाराष्ट्र कृषि व्यापार नेटवर्क MAGNETद्वारा आयोजित किसान उत्पादक संगठनों FPOs के राज्य स्तरीय सम्मेलन का उद्घाटन विपणन मंत्री जयकुमार रावल ने किया। इस अवसर पर बोलते हुए विपणन मंत्री रावल ने कहा कि राज्य में मौजूदा बाजार प्रणाली की तुलना में अधिक आधुनिक, सुसज्जित और विश्व स्तरीय बाजार श्रृंखला स्थापित करने की आवश्यकता है । इसके लिए, राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मार्गदर्शन में, वधान बंदरगाह क्षेत्र में लगभग 1200 एकड़ भूमि पर अत्याधुनिक अंतरराष्ट्रीय मानक वाली बाजार समिति स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। यह बाजार सड़क , रेल , बंदरगाह और हवाई अड्डे से जुड़ा होगा, जिससे महाराष्ट्र न केवल राज्य में बल्कि पूरे देश में कृषि उत्पादों के लिए एक वैश्विक व्यापार केंद्र के रूप में उभरेगा।
किसान संघ के माध्यम से चल रहे आंदोलन से नई ताकत प्राप्त कर रहे हैं।
मंत्री जी ने कहा कि राज्य में किसान उत्पादक संगठन एफपीओ और किसान उत्पादक कंपनियां एफपीसी महज योजनाएं नहीं हैं, बल्कि किसानों के सशक्तिकरण के लिए एक बड़ा आंदोलन हैं। जयकुमार रावल ने बताया कि छोटे और सीमांत किसानों को एकजुट करने और उन्हें बाजार में सक्षम बनाने में इन संगठनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि एफपीओ के माध्यम से उत्पादन से लेकर बिक्री तक की पूरी मूल्य श्रृंखला स्थापित की जा सकती है। इसमें रसद , भंडारण , प्रसंस्करण , पैकेजिंग और विपणन जैसी सभी सेवाएं एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराई जा सकती हैं ।
प्रसंस्करण उद्योग और मूल्यवर्धन पर ध्यान केंद्रित करें
मंत्री रावल ने कहा कि कृषि उपज का मूल्य प्रसंस्करण द्वारा बढ़ाना अत्यंत महत्वपूर्ण है। सौर सुखाने, पैकेजिंग और ब्रांडिंग जैसी विधियों से कृषि उपज को लंबे समय तक संरक्षित किया जा सकता है और अच्छा बाजार मूल्य प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 10,000 करोड़ रुपये की कृषि उपज फसल कटाई के बाद बर्बाद हो जाती है। उन्होंने कहा कि इस नुकसान को रोकने के लिए प्रसंस्करण उद्योग और भंडारण सुविधाएं स्थापित करना आवश्यक है।
डिजिटल मार्केटिंग और ई-एनएएम का उपयोग बढ़ेगा।
मंत्री रावल ने किसानों से पारंपरिक बाजारों तक सीमित रहने के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने की अपील की । उन्होंने कहा कि ई-एनएएम जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बाजार उपलब्ध हो सकते हैं । उन्होंने कहा कि महिला किसान वर्ष के रूप में मनाए जा रहे अंतर्राष्ट्रीय उत्सव के मद्देनजर, महिला जन संगठनों (एफपीओ) के माध्यम से महिला किसानों को सशक्त बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने महिलाओं से कृषि और व्यवसाय में संगठित होकर आगे आने की अपील की।
सरकार का ध्यान दीर्घकालिक समाधानों पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मुश्किल समय में किसानों की मदद के लिए ऋण माफ करने का फैसला किया है। हालांकि, यह एक अस्थायी उपाय है। इसलिए, मंत्री जयकुमार रावल ने स्पष्ट किया कि सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए दीर्घकालिक उपायों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्पादन और विपणन श्रृंखला को मजबूत करके ही कृषि क्षेत्र में वास्तविक परिवर्तन लाया जा सकता है।
मंत्री जयकुमार रावल ने कहा कि किसान उत्पादक संगठनों की परिषद किसानों के कल्याण के लिए काम करने वाला एक आंदोलन है और उन्होंने सभी किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने परिषद को शुभकामनाएं भी दीं।
इस अवसर पर कृषि विपणन बोर्ड के कार्यकारी निदेशक संजय कदम, मुंबई कृषि उपज बाजार समिति के महाप्रबंधक विनायक कोकरे, राष्ट्रीय फसल कटाई पश्चात प्रौद्योगिकी संस्थान के सचिव शरद जारे, एडीबी के अतिरिक्त निदेशक मिलिंद अकारे, डॉ. अमोल यादव और किसान उत्पादक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।