ShubhBhaskar
SHUBHBHASKAR
E Paper

महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही: आंगनवाड़ी में मिट्टी मिला पोषाहार, कार्यकर्ता बनीं गुस्से का निशाना।

By Shubh Bhaskar · 29 Mar 2026 · 28 views
महिला एवं बाल विकास विभाग की लापरवाही: आंगनवाड़ी में मिट्टी मिला पोषाहार, कार्यकर्ता बनीं गुस्से का निशाना।

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- थानागाजी क्षेत्र के बामनवास-2 आंगनवाड़ी केंद्र पर पोषाहार की गुणवत्ता को लेकर एक गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां बच्चों के लिए आए पोषाहार में मिट्टी मिलने की बात सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
एक ओर सरकारें नौनिहालों को पौष्टिक आहार देने के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं जमीनी स्तर पर हालात इसके उलट नजर आ रहे हैं। बामनवास-2 केंद्र पर जब पोषाहार के पैकेट खोले गए, तो उनमें खुलेआम मिट्टी मिली पाई गई। इस घटना ने न केवल बच्चों के स्वास्थ्य पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
आपूर्ति व्यवस्था पर उठे सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि पोषाहार की सप्लाई करने वाली फर्म घटिया सामग्री भेज रही है, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं होती। शिकायतों के बावजूद संबंधित अधिकारियों की ओर से न तो जांच की जाती है और न ही कोई सख्त कदम उठाया जाता है। इससे आपूर्ति व्यवस्था की पारदर्शिता और जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बनीं आसान निशाना
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हो रही हैं। ग्रामीणों का गुस्सा अक्सर उन्हीं पर निकलता है, जबकि उनका कहना है कि वे केवल वितरक की भूमिका में हैं और सप्लाई की गुणवत्ता पर उनका कोई नियंत्रण नहीं होता।
भ्रष्टाचार और सांठ-गांठ के आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और आपूर्तिकर्ता फर्मों के बीच सांठ-गांठ के चलते ऐसे मामलों को दबा दिया जाता है। शिकायतों के बावजूद न तो एफआईआर दर्ज होती है और न ही दोषियों पर कार्यवाही होती है।
पहले भी सामने आ चुके हैं मामले
गौरतलब है कि इससे पहले गोविंदगढ़ क्षेत्र में भी पोषाहार में छिपकली मिलने का मामला सामने आया था, लेकिन उस प्रकरण में भी ठोस कार्यवाही नहीं हो सकी और मामला खानापूर्ति तक सीमित रहा।
*ग्रामीणों की मांग*
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से मांग की है कि—
दोषी आपूर्तिकर्ता फर्म को तत्काल ब्लैकलिस्ट किया जाए।
संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्यवाही की जाए।
पोषाहार की गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच करवाई जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube