23 मार्च शहीद दिवस: स्वतंत्रता अनमोल है, देश हित सर्वोपरि — *डॉ. सुरेश चंद शर्मा*
By Shubh Bhaskar ·
23 Mar 2026 ·
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23 मार्च शहीद दिवस: स्वतंत्रता अनमोल है, देश हित सर्वोपरि — *डॉ. सुरेश चंद शर्मा*
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-जयपुर- सर्व समाज जागृति संघ के संस्थापक अध्यक्ष व बृजवासी गौरक्षक सेना भारत संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ओर अखिल भारतीय संयुक्त ब्राह्मण समन्वय समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता तथा शिव शक्ति संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉऺं. सुरेश चंद शर्मा ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को बताया कि 23 मार्च का दिन भारत में शहीद दिवस के रूप में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1931 में भगत सिंह, शिवराम राजगुरु और सुखदेव थापर को ब्रिटिश हुकूमत ने लाहौर जेल में फांसी दे दी थी। इन तीनों महान क्रांतिकारियों ने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपने प्राणों का बलिदान दिया, जो आज भी देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
डॉ. सुरेश चंद शर्मा ने शहीद दिवस पर अपने संदेश में कहा कि स्वतंत्रता अनमोल है और देशहित सर्वोपरि होना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन वीर सपूतों ने 17 दिसंबर 1928 को अंग्रेज अधिकारी सांडर्स का वध कर विदेशी शासन को चुनौती दी और बाद में केंद्रीय असेंबली में बम फेंककर अपने इरादों को स्पष्ट किया।
शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जीवन पर प्रकाश डालते हुए डॉ. सुरेश चंद शर्मा ने कहा कि वे केवल एक क्रांतिकारी ही नहीं, बल्कि एक महान चिंतक, लेखक, पत्रकार और दार्शनिक भी थे। बचपन से ही उनके मन में देशभक्ति की भावना प्रबल थी। उन्होंने वर्ष 1926 में ‘नौजवान भारत सभा’ का गठन किया और युवाओं को स्वतंत्रता संग्राम के लिए प्रेरित किया। उनका प्रसिद्ध नारा “इंकलाब जिंदाबाद” आज भी देशभक्ति की भावना को प्रज्वलित करता है।
फांसी से एक दिन पूर्व 22 मार्च को जब साथियों ने उन्हें बचाने का प्रस्ताव दिया, तो भगत सिंह ने दृढ़ता से कहा कि यदि वे फांसी से बच गए तो क्रांति का प्रतीक कमजोर पड़ जाएगा, लेकिन यदि वे हंसते-हंसते फांसी पर चढ़े तो देश की माताएं अपने बच्चों को भगत सिंह बनने की प्रेरणा देंगी। उनके इस साहसिक विचार ने उन्हें अमर बना दिया।
23 मार्च 1931 को भगत सिंह ने फंदे को चूमते हुए स्वयं फांसी को स्वीकार किया और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।
डॉ. शर्मा ने अंत में कहा कि शहीद दिवस पर प्रत्येक नागरिक को इन अमर बलिदानियों के त्याग, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए देशहित में तन, मन और धन से योगदान देना चाहिए। उन्होंने भगत सिंह, सुखदेव थापर और शिवराम राजगुरु को कोटि-कोटि नमन किया।