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भावापुर में हुआ भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन

By Shubh Bhaskar · 23 Mar 2026 · 13 views
भावापुर में हुआ भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन


यह रोटी है, यह सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि इससे आत्मा की तृप्ति होती है, यह रोटी है.......... रवीन्द्र कुशवाहा

सुनील कुमार मिश्रा बद्री उत्तर प्रदेश प्रयागराज संगम । सरला राजेंद्र वेलफेयर फाउंडेशन प्रयागराज के द्वारा सरला श्रीवास्तव व राजेन्द्र प्रसाद श्रीवास्तव की स्मृति में भावापुर में रविवार को एक भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया । पुत्रगण कवि शरत चंद्र श्रीवास्तव "सरल" एवं अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव के संयोजन में आयोजित इस कवि सम्मेलन की अध्यक्षता राम कैलाश पाल "प्रयागी" ने की तथा संचालन डॉ. ब्रजेश खरे ने किया।
मां शारदे के पूजन अर्चन के बाद कवि "सरल" द्वारा सरस्वती वंदना की मोहक प्रस्तुति के साथ कवि सम्मेलन आरम्भ हुआ। देवनाथ सिंह "देव" ने मस्त अंदाज़ में कहा कि "चमन के वास्ते अमन की बात करें, ताज़गी जिससे मिले उस चमन की बात करें" तो शम्भू नाथ श्रीवास्तव "शम्भु" ने छंदों के माध्यम से होली का मादक स्वरूप दिखाया । कवयित्री ब्रह्माणी तिवारी ने अपनी हास्य रचनाओं से श्रोताओं को गुदगुदाया तो राकेश मालवीय "मुस्कान" के बालगीत ने उपस्थित बच्चों में जोश का संचार कर दिया । राजीव "नसीब" ने जब 'गुफ्तगू कीजिए ज़िन्दगी से हुजूर ' गजल पढ़ी तो श्रोता झूम उठे। शैलेन्द्र "जय" ने पिता की स्मृतियों को संजोते हुए कहा कि " गुनाह के बीज बोने नहीं दिया, कभी हताश भी होने नहीं दिया , कहां से ले आते थे खिलौना हमें रोने नहीं दिया।"
कवि- कलाकार रवींद्र कुशवाहा ने जीवन की सच्चाई का खाका खींचते हुए रोटी पर पंक्तियां रखीं , "यह रोटी है, सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि इससे आत्मा तृप्त होती है, यह रोटी है" संयोजक "सरल" ने व्यंग्य को उकेरते हुए 'मनरेगा जी राम जी' की रचना से सच्चाई को आईना दिखाया, संचालन कर रहे डॉ. ब्रजेश खरे ने मां पर पढ़ा 'अलौकिक मैकेनिज्म है ये इसे विज्ञान जाने ना, दर्द बेटे को तड़पे मां, हंसे बेटा तो उछले मां, तो तालियों से पंडाल गूंज उठा। अंत में सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे पाल प्रयागी ने अपने चिर परिचित अंदाज़ में मुक्तक सुनाए ' जब तक ज़मीन है जिंदा, आसमान है जिंदा, खेत से खलिहान तक किसान है जिंदा, किसानों का कोई भूलकर सम्मान न छीने, इन्हीं के दम पर हिंदुस्तान है ज़िंदा।' यादगार कवि-सम्मेलन के लिए श्रोताओं ने महिमा अकादमी के निदेशक अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव को बधाई दी।

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