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करोड़ों के फर्जी इंश्योरेंस क्लेम का मामला : सात हादसे, सभी एक ही टेंपो से, शाहपुरा थाने में एफआईआर दर्ज

By Shubh Bhaskar · 21 Mar 2026 · 62 views
करोड़ों के फर्जी इंश्योरेंस क्लेम का मामला : सात हादसे, सभी एक ही टेंपो से, शाहपुरा थाने में एफआईआर दर्ज

शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा-भीलवाड़ा जिले में सक्रिय एक ऐसा रैकेट सामने आया है जो पुलिस की मिली भगत से सडक़ों पर फर्जी दुर्घटनाएं दिखाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों रुपये डकारने का प्रयास कर रहा था। आई सी आई सी आई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी की शिकायत और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की प्राथमिक जांच के बाद शाहपुरा थाने में धोखाधड़ी और साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया है। भौगोलिक संदर्भ
एक ही शख्स, 7 दुर्घटनाएं और हर बार वही टेम्पो !
जांच में सामने आया कि पुर निवासी अत्ता मोहम्मद पुत्र मोहम्मद कासम अंसारी इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड है। ताज्जुब की बात यह है कि अत्ता मोहम्मद के खिलाफ भीलवाड़ा के अलग-अलग थानों जिनमें पुर, प्रतापनगर, सुभाषनगर, शंभूगढ़, शाहपुरा और कोटड़ी शामिल हैं, इन थानों में कुल 7 मुकदमे दर्ज हैं और सभी के सभी केवल सडक़ दुर्घटना से संबंधित हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, अत्ता मोहम्मद ने अपने टेम्पो (आरजे-06-पीए-3673) को बार-बार दुर्घटनाओं में शामिल दिखाया। कभी वह खुद चालक बन जाता, तो कभी वाहन स्वामी। हद तो तब हो गई जब शंभूगढ़ और प्रतापनगर के मामलों में वह दूसरी गाडिय़ों (कार और लोडिंग टेम्पो) का भी चालक बनकर दुर्घटना करता पाया गया। बीमा कंपनी का आरोप है कि यह कोई इत्तफाक नहीं, बल्कि संगठित अपराध है।
पुलिस अधिकारी की भूमिका भी संदिग्ध, उठी जांच की मांग
बीमा कंपनी ने शाहपुरा थाने के तत्कालीन एएसआई महावीर सिंह पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, एएसआई ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी स्वतंत्र गवाह के फर्जी तफ्तीश तैयार की।
बदल दिया गया टेंपो, फर्जी मैकेनिकल रिपोर्ट बनाई
बदला गया टेम्पोः दुर्घटना के समय जिस टेम्पो का जिक्र था, उस पर 'चन्देल' लिखा था, लेकिन जब जब्ती हुई तो अत्ता मोहम्मद का 'या गरीब नवाज' लिखा हुआ टेम्पो पेश कर दिया गया। आरोप है कि पुलिस ने सांठगांठ कर बिना किसी टूट-फूट के ही टेम्पो की मैकेनिकल मुआयना रिपोर्ट तैयार कर दी ताकि क्लेम पास कराया जा सके।
एएसपी की जांच में खुले राज
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, शाहपुरा राजेश आर्य ने मामले की जांच में पाया कि, ज्यादातर एफआईआर घटना के कई दिनों बाद देरी से दर्ज कराई गईं। दुर्घटना के 6 दिन बाद खुद वाहन स्वामी ने गाड़ी थाने में सरेंडर की। दुर्घटना करने वाले असली वाहन और चालक को बचाकर बीमाशुदा वाहन को जानबूझकर फाइल में डाला गया। स्वतंत्र गवाहों के बजाय केवल घायलों के परिचितों के बयान दर्ज किए गए।

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