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धर्मनगरी में ‘नॉन-वेज’ पर प्रतिबंध बेअसर, होटल-ढाबों से लेकर छोटी दुकानों व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक सप्लाई जारी, राजपाल के आदेश टांय-टांय फिश अधिकारी चाट रहे मलाई, भाड़ में जाएं आदेश

By Shubh Bhaskar · 21 Mar 2026 · 27 views
धर्मनगरी में ‘नॉन-वेज’ पर प्रतिबंध बेअसर, होटल-ढाबों से लेकर छोटी दुकानों व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स तक सप्लाई जारी, राजपाल के आदेश टांय-टांय फिश
अधिकारी चाट रहे मलाई, भाड़ में जाएं आदेश

अश्विनी वालिया कुरुक्षेत्र वर्ष 2017 में राज्यपाल के आदेशों पर
पवित्र धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में नॉन-वेज बिक्री पर लगे प्रतिबंध के बावजूद इसका कारोबार बेखौफ तरीके से जारी है। हालात यह हैं कि शहर के कुछ होटल, ढाबे और गली-मोहल्लों में चल रही छोटी-छोटी मीट की दुकानों से लेकर ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स तक नॉन-वेज की सप्लाई खुलेआम हो रही है। लोगों का कहना है कि राज्यपाल के आदेश तो भाड़ में जाएं इसके चलते अफसरों की चांदी बनी हुई है ओर वे मलाई चाट रहे हैं।
इस मामले को लेकर जमीनी स्तर पर की गई पड़ताल में सामने आया है कि शहर के कई इलाकों में छोटे स्तर पर मीट की दुकानें संचालित हो रही हैं, तो बड़े बड़े होटल ओर रेस्टोरेंट भी इससे अछूते नहीं हैं। जहां बिना किसी रोक-टोक के नॉन-वेज बेचा जा रहा है। वहीं कुछ नामी गिरामी होटलों और ढाबों में बकायदा मेन्यू बनाकर ग्राहकों को सरे आम नॉन-वेज परोसा जा रहा है। अधिकारियों से बात की जाती है तो वह कहते हैं की शिकायत दीजिए कार्रवाई करेंगे। खुद उनकी कार्य के प्रति ईमानदारी ओर नैतिक जिम्मेदारी यहां कहां चली जाती है पता ही नहीं चलता
बात कितने तक आकर रुक नहीं जाती बल्कि इसके साथ ही ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म्स ने इस सप्लाई चेन को और मजबूत कर दिया है। मोबाइल ऐप्स के जरिए उपभोक्ता आसानी से नॉन-वेज आइटम्स ऑर्डर कर रहे हैं और डिलीवरी बॉय बिना किसी बाधा के सीधे घरों तक ऑर्डर पहुंचा रहे हैं। आप चाहे तो ब्रह्म सरोवर जैसी पवित्र जगह पर भी ऑनलाइन फूड डिलीवरी के जरिए नॉनवेज मंगवा सकते हैं। इससे साफ है कि प्रतिबंध केवल कागजों तक सीमित रह गया है। इस मुद्दे को लेकर आरटीआई कार्यकर्ता अश्विनी कुमार, विपिन, अरविंद मोहन शर्मा, विशाल अरोड़ा और चंद्रप्रकाश अरोड़ा सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि वर्ष 2017 में लागू किए गए प्रतिबंध की खुलेआम अवहेलना हो रही है, जो बेहद गंभीर मामला है लेकिन प्रशासन इस मामले में पूरी तरह से बचता नजर आ रहा है। इस मामले में यह खास बात भी है कि इस शब्द में राजनीतिक हस्तक्षेप होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता भले ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शहर की पवित्रता के कितने ही ढिंढोरे पिटे जाए पर असल हकीकत यही है की दावे मात्र दावे तक सीमित है धरातल पर कार्रवाई शून्य के समान है।
स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि प्रशासन की ढिलाई के चलते यह अवैध कारोबार लगातार फैल रहा है। आरोप है कि समय-समय पर दिखावे की कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।
कुछ सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने भी प्रशासन को घेरते हुए कहा है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से पूरी जानकारी लेकर संबंधित होटल, ढाबों और दुकानों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकती है। लोगों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सख्ती नहीं बरती गई तो इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाया जाएगा।
धर्मनगरी की पहचान और पवित्रता को लेकर उठते इन सवालों के बीच अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर कब और कितना प्रभावी कदम उठाता है।

महज दिखावे तक सिमट कर रह जाती है कार्रवाई - खास बात यह भी है कि ऐसे मामले में सिर्फ कार्रवाई होती है और दिखावे के लिए होकर रह जाती है और सैटिंग की फीस को पहले से कहीं अधिक भी बढ़ा देती है। आमजन और पत्रकारों को जब यह सब नजर आता है तो फिर अधिकारियों को क्यों नहीं आता यह बड़ा सवाल है और अधिकारी चाहे तो महज दो दिन में पूरे शहर से नॉनवेज की सप्लाई बंद कर सकते हैं।
बॉक्स-नशीले पदार्थ भी हैं प्रतिबंधित तो कानून अलग क्यों-नशीले पदार्थों को सरकार द्वारा प्रतिबंधित किया हुआ है और ऐसे में नशीले पदार्थ पकड़े जाने पर लंबी सजा भी होती है और ऐसे कार्य करने वालों को जेल भी जाना पड़ता है लेकिन दूसरी तरफ शहर में नॉनवेज की खरीद और सेल दोनों प्रतिबंधित है पर यहां इस प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं होती जबकि प्रतिबंध की श्रेणी में यदि कुछ आता है तो उसको इस प्रकार डील किया जाना चाहिए जैसे अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं या पदार्थ।

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