राष्ट्रीय समृद्ध खटीक समाज सेवा संस्थान द्वारा दिया गया ज्ञापन
By Shubh Bhaskar ·
13 Mar 2026 ·
395 views
राष्ट्रीय समृद्ध खटीक समाज सेवा संस्थान द्वारा दिया गया ज्ञापन
भीलवाड़ा (शाहपुरा)-राजेन्द्र खटीक
शाहपुरा-दिल्ली प्रदेश खटीक समाज (रजि.) दिल्ली के 10 लाख खटीकों की प्रतिनिधि संस्था है जो इण्डिया खटीक फेडरेशन से सम्बंधित है।हम इनके पदाधिकारी गण भारी ह्रदय व बड़े दुःख के साथ बताना चाहते है कि पश्चिम दिल्ली के उत्तम नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हस्ताताल कॉलोनी ,दिल्ली में होली के दिन 4 मार्च 2026 को एक बच्ची से होली का रंग पड़ोसी एक मुस्लिम नारी के ऊपर गिर जाने से वह अत्यंत क्रोधित हो गई और अन्य लोगो के साथ पीड़ित परिवार से लड़ने लगे और रात को जब को जब तरुण खटीक घर आ रहा था।उस परिवार ने अपने साथियों के साथ मिलकर भयंकर हमला कर दिया और हॉकी,बेल्ट,लात-घुसो व जो भी हथियार मिला उससे युवा तरुण को मृत्यु जो जाने तक लगातार मारते रहे।उसकी मृत्यु पर क्षेत्र के लोगो मे गहरा रोष भर आया।दिनांक-6 मार्च 2026 को क्षेत्रीय नागरिको,फेडरेशन व अन्य संगठन समेत हजारों लोगों ने पुलिस थाने पर प्रदर्शन किया।अगले दिन तरुण खटीक तिये के अवसर पर पूरे देश के समाज बन्धु आये जिससे सभी और पुलिस हरकत में आयी।इस संदर्भ में राष्ट्रीय समृद्ध खटीक समाज सेवा संस्थान शाहपुरा की तरफ से अतिरिक्त कलेक्टर प्रकाश चन्द्र रेगर को महामहिम राष्ट्रपति महोदय,महामहिम प्रधानमंत्री महोदय,महामहिम गृहमंत्री महोदय,माननीय मुख्यमंत्री महोदय दिल्ली के नाम ज्ञापन दिया।जिसमें राष्ट्रीय समृद्ध खटीक समाज सेवा संस्थान शाहपुरा से मदन बाछड़ा,कालूराम बाछड़ा,घनश्याम चावला, श्याम खींची,भैरू लाल खटीक (फौजी),राधेश्याम टांक, शिवराम खींची,रमेश टेपण,त्रिलोक खींची,राजेश सौलंकी, राजेन्द्र चन्देरिया, जगदीश चन्द्र खटीक आदि सदस्य उपस्थित रहे।इस सभी सदस्यगण ने मांग की है कि सभी अपराधियो को तुरंत पकड़ कर उनको पूरे सबूतों के साथ चार्जशीट फाइल किया जाए।जिससे अपराधियो को फाँसी की सजा मिल सके।परिवार युवक उच्च शिक्षित और अकेला कमाने वाला है।उसकी पूर्ति तो नही हो सकती फिर भी पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।परिवार के एक सदस्य को सरकारी नोकरी दी जाए। आशा ही नही हमे विश्वास है कि आप सभी अपराधियो को तुरंत पकड़वाने के साथ पीड़ित परिवार को सहयोग की अनुशंसा करेगे जिससे आगे कोई भी इस प्रकार का दुस्साहस करने की सोच भी न सके।