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गुरु खुद ही रामद्वारा रे"- कैलाश मण्डेला धर्म-सभा में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने जमाया रंग

By Shubh Bhaskar · 07 Mar 2026 · 6 views
"गुरु खुद ही रामद्वारा रे"- कैलाश मण्डेला
धर्म-सभा में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने जमाया रंग

भीलवाड़ा (शाहपुरा)-राजेन्द्र खटीक।

शाहपुरा-अंतरराष्ट्रीय राम स्नेही सम्प्रदाय की मुख्य पीठ पर चल रहे पांच दिवसीय फूलडोल महोत्सव के चतुर्थ दिवस पर रात्रि में आयोजित धर्म सभा में साहित्य सृजन कला संगम के सचिव एवं अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि एवं केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत साहित्यकार डॉ.कैलाश मण्डेला के संचालन में आयोजित आध्यात्मिक कवि सम्मेलन ने उपस्थित जन समुदाय को आनंद से विभोर कर दिया। पीठाधीश जगद्गुरु आचार्य श्री राम दयाल जी महाराज और संतजन की उपस्थिति में हुए इस गरिमामय कवि सम्मेलन का प्रारंभ पं. सुनील भट्ट की गुरुवंदना एवं काव्य पाठ से हुआ जिसे सभी ने सराहा। हास्य कवि दिनेश बंटी ने अपनी हास्य रचनाओं से सभी को खूब हॅंसाया। उनकी बैंड-बाजा और बच्चों की वर्तमान स्थिति पर रचित कविता को खूब पसंद किया गया। इंदौर के वीर रस के कवि मुकेश मोलवा ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुति से देश, समाज, हिंदुत्व और गौ माता पर अपनी रचनाओं से श्रोताओं में जोश भर दिया। कवि सम्मेलन के सूत्रधार एवं संचालक कवि कैलाश मण्डेला ने हास्य, वीर और आध्यात्म से ओत-प्रोत रचनाओं से अद्भुत समान बांधा। अपनी हास्य पैरोडियों, हेली गीतों और गुरु वंदना "गुरु खुद ही रामद्वारा रे, ज्यांका भर्या हुया भंडारा रे" सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। आचार्य श्री ने धर्म और साहित्य की महत्ता को रेखांकित करते हुए सभी कवियों और उपस्थित पत्रकारों का शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया।

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