ShubhBhaskar
SHUBHBHASKAR
E Paper

कालपी में विनोद चतुर्वेदी की ‘दरवाज़े-तक’ राजनीति—हर गली-सड़क से भरोसे की बुनियाद*

By Shubh Bhaskar · 06 Mar 2026 · 20 views
*कालपी में विनोद चतुर्वेदी की ‘दरवाज़े-तक’ राजनीति—हर गली-सड़क से भरोसे की बुनियाद*
दैनिक शुभ भास्कर नीरज प्रजापति उत्तर प्रदेश बुंदेलखंड

उरई -कालपी विधानसभा में विनोद चतुर्वेदी के कामकाज को लेकर स्थानीय बातचीत गरम है। लोगों का कहना—अपने कार्यकाल में उन्होंने लगभग सभी मुख्य मार्ग शासन-स्तर से स्वीकृत कराकर पक्के कराए, टूटी सड़कों-जर्जर सम्पर्क-मार्गों को प्राथमिकता दी, और निर्माण-गुणवत्ता पर फील्ड में खड़े होकर नज़र रखी।

*जन-सुनवाई का तरीका:* प्रतिदिन में निश्चित दिन घर/कार्यालय पर खुली सभा—बिजली-पानी-राशन-पेंशन से लेकर थाने-तहसील के अटकाव तक, हर अर्ज़ी पर नोटिंग, अफसरों को फोन-निर्देश और समय-बद्ध फॉलो-अप। शिकायतकर्ता को पर्ची-नम्बर, कार्रवाई का अपडेट—इस ‘ट्रैकिंग’ से भरोसा बढ़ा।

*मौके की मौजूदगी:* किसी के यहाँ मृत्यु-सूचना हो या बेटी की शादी—गाड़ी मुड़ती है कालपी देहात की ओर; संवेदना और बधाई में शिरकत को लोग ‘रिश्ता’ मानते हैं, सिर्फ फोटो-नीति नहीं।

*छोटे-बड़े जन-कार्य:* कस्बाई बाजार, बस-स्टैंड और प्याऊ वाले मोहल्लों में वॉटर कूलर लगवाना, गर्मी में राहत; अतिक्रमण या रसूख-दबाव की शिकायत पर अफसरों को रोकना—‘अंकुश’ की यह छवि स्थानीय चौपालों में बार-बार दुहराई जाती है।

इन वजहों से कालपी की चौपालों में यह लाइन आम है—“विधायक हो तो विनोद चतुर्वेदी जैसा।” आगामी विधानसभा को लेकर लोग यही जोड़-घटाव करते हैं कि यह जमीन-जुड़ाव बरकरार रहा तो उनका फिर से सदन पहुँचना तय माना जा रहा है।

More News

Share News

WhatsApp

X

Facebook

Telegram

Instagram

YouTube