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टीईटी अनिवार्यता पर बगावत: ललितपुर से उठी चिंगारी, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी हजारों शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन — “20 साल सेवा के बाद फिर परीक्षा क्यों?”

By Shubh Bhaskar · 27 Feb 2026 · 73 views
टीईटी अनिवार्यता पर बगावत: ललितपुर से उठी चिंगारी, देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

हजारों शिक्षकों का शक्ति प्रदर्शन, प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन — “20 साल सेवा के बाद फिर परीक्षा क्यों?”
ललितपुर, उत्तर प्रदेश।
जनपद मुख्यालय मंगलवार को शिक्षकों के आक्रोश और नारों से गूंज उठा, जब विभिन्न मान्यता प्राप्त शिक्षक संगठनों ने एक मंच पर आकर टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के खिलाफ विशाल धरना-प्रदर्शन किया। आंदोलन का नेतृत्व Teachers Federation of India के बैनर तले किया गया, जिसमें हजारों की संख्या में शिक्षक शामिल हुए।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के बाहर जुटे शिक्षकों ने स्पष्ट संदेश दिया— “सम्मान से समझौता नहीं होगा।” प्रदर्शन के उपरांत भारत सरकार के माननीय प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी ललितपुर को सौंपा गया, जिसमें टीईटी की अनिवार्यता पर पुनर्विचार की मांग की गई।
📢 तीन चरणों में सुलगा आंदोलन
शिक्षक संगठनों ने आंदोलन को चरणबद्ध रणनीति के तहत आगे बढ़ाया—
पहला चरण (22 फरवरी):
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर हैशटैग अभियान चलाया गया, जो करीब ढाई घंटे तक देश में ट्रेंड करता रहा।ू
दूसरा चरण (23 फरवरी से):
विद्यालयों में काला फीता बांधकर शिक्षकों ने शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया।
तीसरा चरण:
पानी की टंकी, सदर कांटा, पुराना बस स्टैंड और तुवन चौराहे से होते हुए विशाल जुलूस जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा, जहां धरना-प्रदर्शन के बाद ज्ञापन सौंपा गया।
“सम्मान के विरुद्ध परीक्षा” — शिक्षकों का तर्क
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नियुक्ति के समय उन्होंने सभी आवश्यक अर्हताएं पूरी की थीं। ऐसे में 20–25 वर्षों की सेवा के बाद दोबारा परीक्षा की अनिवार्यता उनके आत्मसम्मान और अनुभव पर प्रश्नचिह्न है।
नेताओं ने दोहराया कि यह आंदोलन सरकार से टकराव के लिए नहीं, बल्कि न्याय, गरिमा और सेवा के सम्मान की रक्षा के लिए है।
संयुक्त मोर्चा: कई संगठनों की भागीदारी
प्रदर्शन में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ (पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ) और उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ सहित कई संगठनों के पदाधिकारी एवं शिक्षक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
धरने को वेद प्रकाश मिश्रा (राष्ट्रीय सचिव, Teachers Federation of India), राजेश लिटौरिया (जिलाध्यक्ष), नीरज चतुर्वेदी (जिलाध्यक्ष, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ) तथा श्रीमती आरती सिंह कुशवाहा (अध्यक्ष, महिला शिक्षक संघ) ने संबोधित किया। संचालन जिला मंत्री अरुण गोस्वामी ने किया।
सरकार को चेतावनी
शिक्षक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक विस्तारित किया जाएगा।
ललितपुर से उठी यह आवाज अब शिक्षा नीति पर व्यापक बहस को जन्म दे रही है। सवाल यह है कि क्या सरकार वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों की मांगों पर संवेदनशीलता दिखाएगी या यह आंदोलन और व्यापक रूप लेगा?
यह संघर्ष अब केवल एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि व्यवस्था और सम्मान के बीच उभरते टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है।

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