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विद्यालय केवल पढ़ने की जगह नहीं, जीवन गढ़ने का तीर्थ हैः प्रदेशाध्यक्ष पुष्करणा*

By Shubh Bhaskar · 26 Feb 2026 · 20 views
*विद्यालय केवल पढ़ने की जगह नहीं, जीवन गढ़ने का तीर्थ हैः प्रदेशाध्यक्ष पुष्करणा*



*दो मित्रों की अमिट मित्रता: बचपन से सेवानिवृत्ति तक रहे एक साथ*



राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय ने किया भावभीना अभिनंदन



दैनिक शुभ भास्कर राजस्थान चित्तौड़गढ़ रामसिंह मीणा रघुनाथपुरा
बड़ीसादड़ी। जीवन में कुछ संयोग ऐसे होते हैं, जो हृदय को भीतर तक स्पर्श कर जाते हैं—जहां मुस्कान और आंसू एक साथ आंखों में उतर आते हैं। बोहेड़ा के दो परम मित्र महेंद्र कुमार जैन और नर्बदा शंकर पुष्करणा ऐसे ही दुर्लभ और प्रेरणादायी संयोग के जीवंत प्रतीक हैं। बचपन में एक साथ खेलना-कूदना, एक ही स्कूल की बेंच साझा करना, शिक्षक प्रशिक्षण में कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ना, और फिर एक ही दिन राजकीय सेवा में प्रवेश कर 28 फरवरी को एक साथ सेवानिवृत्त हो रहे - यह मित्रता शिक्षक समाज के लिए एक अनूठी प्रेरणा बन चुकी है। यह कहानी केवल दो व्यक्तियों की नहीं, बल्कि उस सच्ची मित्रता की है जो समय, परिस्थितियों और वर्षों की दूरी को पार करते हुए आज भी उतनी ही जीवंत, मजबूत और भावपूर्ण है। यह मित्रता यह संदेश देती है कि सच्चे रिश्ते कभी समाप्त नहीं होते, वे केवल नए रूप में आगे बढ़ते हैं।इस दुर्लभ संयोग पर राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि बचपन की मासूम दोस्ती से लेकर सेवा के अंतिम क्षण तक साथ निभाना जीवन का सबसे सुंदर संयोग है। ऐसे मित्र ही जीवन को सार्थक बनाते हैं।
बांसी–बोहेड़ा रेलवे स्टेशन के निकट आसावरा माता मंदिर परिसर में आयोजित भव्य अभिनंदन समारोह में राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय की जिला शाखा एवं उपशाखा बड़ीसादड़ी द्वारा दोनों मित्र शिक्षकों का सम्मान किया गया। समारोह में फूलमालाओं से स्वागत, मेवाड़ी पाग पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर, अभिनंदन पत्र व स्मृति उपहार भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया। यह दृश्य उपस्थित जनसमूह के लिए अत्यंत भावुक और प्रेरणास्पद बन गया।
मुख्य अतिथि एवं राजस्थान शिक्षक संघ राष्ट्रीय के प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने अपने उद्बोधन में कहा कि सेवानिवृत्ति जीवन का अंत नहीं, बल्कि सेवा परिवर्तन का अवसर है। यह समाज सेवा और नेक कार्यों की नई यात्रा की शुरुआत है। जैसे ये दो मित्र जीवनभर साथ चले, वैसे ही समाज निर्माण के नए अध्याय में भी आपकी भूमिका प्रेरणादायी होगी। यह सूर्यास्त नहीं, बल्कि चंद्रमा की शीतल ज्योति का उदय है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज निर्माण में शिक्षकों की भूमिका सदैव अग्रणी रही है और भविष्य में भी शिक्षक राष्ट्र निर्माण की दिशा तय करने वाली शक्ति बने रहेंगे। प्रदेशाध्यक्ष पुष्करणा ने प्रदेश के सभी शिक्षक - शिक्षकाओं से हमारा विद्यालय हमारा तीर्थ थीम पर समर्पित सेवा देने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ने की जगह नहीं बल्कि जीवन गढ़ने का तीर्थ है।
इस अवसर पर शिक्षक संघ के संभाग संगठन मंत्री रमेश चंद्र पुरोहित,जिला अध्यक्ष पूरणमल लोहार, प्रदेश प्रकोष्ठ सदस्य प्रकाश बक्षी, जिला मंत्री कैलाश चंद्र मालू, उपशाखा अध्यक्ष पूरणमल ढोली, पीएम श्री विद्यालय के प्रधानाचार्य सुभाष चंद्र बुनकर, हीरालाल सालवी, राष्ट्रीय बैडमिंटन निर्णायक चंद्रकांत शर्मा, उप प्रधानाचार्य बाबू लाल पोरवाल, प्रदीप वैष्णव, प्रधानाध्यापक भगवतसिंह शक्तावत, डायरेक्टर सहकारी संघ जगदीश चंद्र चौबीसा, दिनेश चन्द्र जणवा, तेजपाल जणवा, ओमप्रकाश शर्मा, उप शाखा मंत्री शम्भुदास वैष्णव सहित बड़ी संख्या में शिक्षकजन व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।कार्यक्रम का संचालन कैलाश चन्द्र मालू ने किया

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