टीईटी की अनिवार्यता पर बवाल, आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को छूट देने की मांग तेज=जिला अध्यक्ष राजेश लिटोरिया
ललितपुर से उठी आवाज, अब राष्ट्रीय आंदोलन की चेतावनी
ललितपुर/नई दिल्ली।
देशभर में शिक्षकों के बीच टीईटी अनिवार्यता को लेकर बड़ा असंतोष उभर आया है। Teachers Federation of India के बैनर तले शिक्षकों ने आरटीई लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट देने की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से लागू हुआ था। अधिनियम के लागू होने के बाद नियुक्त शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य की गई थी, जबकि उससे पहले नियुक्त शिक्षकों को इस शर्त से मुक्त रखा गया था।
लेकिन 1 सितम्बर 2020 को Supreme Court of India के एक निर्णय के बाद देशभर में आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति हेतु टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय उनके साथ अन्यायपूर्ण है, क्योंकि नियुक्ति के समय यह शर्त लागू नहीं थी।
ललितपुर में धरना, प्रधानमंत्री को भेजा ज्ञापन
जनपद ललितपुर में 26 फरवरी 2025 को दोपहर 1 बजे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर शिक्षकों ने धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी के माध्यम से प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।
ज्ञापन में मांग की गई है कि केंद्र सरकार अध्यादेश लाकर संसद में कानून पारित करे, जिससे आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी छूट दी जा सके।
चेतावनी: मांग न मानी तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन
शिक्षक नेताओं — राजेश लिटीरिया, औरती सिंह कुशवाहा एवं पं. नीरज कुमार धतुर्वेदी — ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने शीघ्र निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और तेज किया जाएगा।
राजनीतिक हलकों में हलचल
इस मुद्दे ने शिक्षा जगत के साथ-साथ राजनीतिक गलियारों में भी हलचल मचा दी है। लाखों शिक्षकों के भविष्य से जुड़े इस फैसले पर केंद्र सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अब निगाहें केंद्र सरकार पर टिकी हैं — क्या शिक्षकों को राहत मिलेगी या आंदोलन और उग्र होगा?