NH-148D फोरलेन परियोजना: कस्बे में बायपास निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने उठाई आवाज
By Shubh Bhaskar ·
25 Feb 2026 ·
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NH-148D फोरलेन परियोजना: कस्बे में बायपास निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने उठाई आवाज
शाहपुरा-राजेन्द्र खटीक।
पण्डेर - राष्ट्रीय राजमार्ग NH-148D के टू-लेन से फोरलेन उन्नयन कार्य को लेकर कस्बेवासियों में चिंता बढ़ती जा रही है। कस्बे की घनी आबादी के बीच से प्रस्तावित फोरलेन मार्ग निकालने के विरोध में ग्रामीणों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को संबोधित ज्ञापन प्रेषित कर पण्डेर के दक्षिण दिशा में बायपास निर्माण की स्वीकृति देने की मांग की है। ज्ञापन की प्रतिलिपि सांसद, जिला कलेक्टर, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक, क्षेत्रीय विधायक एवं उपखंड अधिकारी को भी भेजी गई है। ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि NH-148D के किलोमीटर 141.000 से 144.500 तक लगभग 3.5 किलोमीटर क्षेत्र में पण्डेर गांव की घनी बसावट है। सड़क के दोनों ओर वर्षों से सैकड़ों परिवार निवास कर रहे हैं और उन्होंने वैध रूप से भूखंड खरीदकर मकान व व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित किए हैं। यदि फोरलेन सड़क का विस्तार वर्तमान आबादी क्षेत्र से किया जाता है तो लगभग 500 परिवारों के मकान, दुकानें और आजीविका पर सीधा असर पड़ेगा। इससे न केवल आर्थिक क्षति होगी बल्कि सामाजिक अस्थिरता भी उत्पन्न होगी। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि सड़क के आसपास कई महत्वपूर्ण सार्वजनिक संस्थान स्थित हैं, जिनमें विद्यालय, अस्पताल, पुलिस थाना, मंदिर, जलदाय विभाग, विद्युत ग्रिड, उपतहसील कार्यालय सहित अन्य सरकारी भवन शामिल हैं। आबादी क्षेत्र के बीच से चौड़ी सड़क गुजरने पर दुर्घटनाओं की आशंका कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे आमजन, विशेषकर स्कूली बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
ग्रामीणों ने ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि यह मार्ग पूर्व में भीलवाड़ा–देवली रोड के रूप में MDR-56 था। वर्ष 2009-10 में इसे मेगा हाईवे घोषित किया गया और बाद में 2012-13 में इसे राष्ट्रीय राजमार्ग NH-148D के रूप में स्वीकृति मिली। उस समय टू-लेन सड़क का निर्माण आबादी क्षेत्र से पर्याप्त दूरी रखते हुए किया गया था, जिससे किसी को विशेष नुकसान नहीं उठाना पड़ा। वर्तमान में इसे फोरलेन में परिवर्तित करने की योजना है। ग्रामवासियों का सुझाव है कि कस्बे के दक्षिण दिशा में पर्याप्त चारागाह एवं सरकारी भूमि उपलब्ध है, जहां बायपास का निर्माण अपेक्षाकृत कम लागत और कम विस्थापन के साथ संभव है। इससे गांव की बसावट सुरक्षित रहेगी, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यातायात भी सुगम रहेगा।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि स्थानीय परिस्थितियों का पुनः सर्वे करवाकर व्यवहारिक समाधान निकाला जाए।ग्रामवासियों ने विश्वास जताया है कि जनहित को प्राथमिकता देते हुए सरकार बायपास निर्माण की स्वीकृति प्रदान करेगी, जिससे विकास और जनसुरक्षा के बीच संतुलन कायम रह सके। इस दौरान भूतपूर्व सैनिक दुर्गा लाल भाट, लोकेश शर्मा, भवानी लाल माली, योगेश शर्मा, पूर्व चिकित्सक नरेंद्र कुमार पंचोली, महावीर भाट, कालुराम भाट, नवीन कुमार डाणी, कैलाश चन्द्र तिवाड़ी सहित अन्य कस्बेवासी मौजूद रहें।