मेरा मोहल्ला, मेरा अभिमान,, शिक्षित और संपन्न होना सही जीवन जीने की गारंटी नहीं।
By Shubh Bhaskar ·
24 Feb 2026 ·
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मेरा मोहल्ला, मेरा अभिमान,,
शिक्षित और संपन्न होना सही जीवन जीने की गारंटी नहीं।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- अलवर- अक्सर यह माना जाता है कि शिक्षा और संपन्नता व्यक्ति के जीवन स्तर को बेहतर बनाती है और उसे सभ्य जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देती है। लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इस धारणा को चुनौती देती नजर आती है।
शहर के वार्ड नंबर 10 स्थित मीणा पाड़ी मोहल्ले में भेरुजी के मंदिर के पास की गली पिछले दो महीनों से गंदगी से अटी पड़ी है। नालियां जाम हैं, कचरे के ढेर लगे हुए हैं और सड़ांध से स्थानीय लोग परेशान हैं। हैरानी की बात यह है कि इस मोहल्ले में आईएएस, आईपीएस, आईआरएस और आरएएस जैसे उच्च पदों पर आसीन अधिकारी निवास करते हैं। लगभग हर घर में शिक्षित और संपन्न परिवार रहता है, बच्चों की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में होती है और संसाधनों की कोई कमी नहीं है।
इसके बावजूद गली की सफाई को लेकर न तो कोई ठोस पहल नजर आती है और न ही सार्वजनिक रूप से विरोध या शिकायत की सक्रियता दिखाई देती है। सवाल यह उठता है कि जब समाज का शिक्षित और सक्षम वर्ग ही अपने आसपास की मूलभूत समस्याओं के प्रति उदासीन हो जाए, तो आम नागरिकों से क्या अपेक्षा की जा सकती है?
स्थिति केवल एक मोहल्ले तक सीमित नहीं है। पूरे अलवर शहर में शिक्षित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की लंबी श्रृंखला है, जिन्हें शासन द्वारा तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं ताकि वे नागरिकों को बेहतर व्यवस्थाएं दे सकें। इसके बावजूद शहर स्वच्छता के मामले में लगातार पिछड़ता दिखाई देता है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी कई इलाकों में कचरा, जाम नालियां और अव्यवस्था आम दृश्य बन चुके हैं।
यह परिदृश्य इस सोच पर पुनर्विचार करने को मजबूर करता है कि केवल डिग्री, पद और धन ही बेहतर जीवन का आधार नहीं हो सकते। जब तक नागरिक चेतना, जिम्मेदारी और सामूहिक भागीदारी नहीं होगी, तब तक शिक्षा और संपन्नता भी अधूरी साबित होती रहेगी।
“मेरा मोहल्ला, मेरा अभिमान” केवल नारा बनकर न रह जाए, बल्कि हर नागरिक अपने आसपास की स्वच्छता और व्यवस्था को लेकर सक्रिय भूमिका निभाए — यही समय की मांग।