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निकम्मे तंत्र को घेरा, बोले- "सरकारी फाइलों के बोझ तले दबकर मर रहा है प्रदेश का गौवंश!"

By Shubh Bhaskar · 24 Feb 2026 · 17 views
दैनिक शुभ भास्कर

संवाददाता सुरेश कुमार पटेरिया


विधानसभा में फूटा विधायक चेतन पटेल का 'गौ-आक्रोश'।

निकम्मे तंत्र को घेरा, बोले- "सरकारी फाइलों के बोझ तले दबकर मर रहा है प्रदेश का गौवंश!"


कोटा ग्रामीण जयपुर विधानसभा के मौजूदा सत्र में पीपल्दा विधायक चेतन पटेल ने गौवंश की दुर्दशा पर वो 'सच्चाई' सामने रखी है, जिससे सरकार और प्रशासन के पसीने छूट गए हैं। पटेल ने सीधे शब्दों में सरकार को चेतावनी दी कि "अगर गौवंश के नाम पर सिर्फ राजनीति करनी है तो बता दें, क्योंकि आपकी फाइलों में तो गाय सुरक्षित है, पर सड़कों और पटरियों पर वह बेमौत मर रही है।

"
प्रशासनिक लापरवाही पर 'सर्जिकल स्ट्राइक':
विधायक ने सदन में सबूतों के साथ बताया कि कैसे सरकारी सिस्टम गौशालाओं का गला घोंट रहा है।

बजट का 'ब्लैक होल':- प्रदेश की 2500 गौशालाओं का 1120 करोड़ रुपये का अनुदान दबाकर बैठे अफसरों से पटेल ने पूछा कि क्या यह पैसा अधिकारियों की जेब भरने के लिए है या बेजुबानों के चारे के लिए?
कोटा के साथ सौतेला व्यवहार: कोटा की 28 गौशालाओं का 15 करोड़ का भुगतान रोकना प्रशासनिक तानाशाही का प्रमाण है।
क्रेडिट कार्ड योजना या 'मजाक'?: विधायक ने दहाड़ते हुए कहा कि 2 लाख परिवारों के आवेदन रिजेक्ट करना प्रशासनिक विफलता है। क्या सरकार ने यह योजना सिर्फ विज्ञापन देने के लिए बनाई थी?
"गाय आपकी राजनीति का मोहरा नहीं!"
पटेल ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि सड़कों पर तड़पता और पॉलिथीन खाता गौवंश सरकार के 'गौ-संरक्षण' के दावों पर तमाचा है। उन्होंने मांग की कि अनुदान को 9 महीने से बढ़ाकर 12 महीने किया जाए और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो जो बजट पास होने के बावजूद भुगतान रोक कर बैठे हैं।


पीपल्दा विधायक चेतन पटेल की हुंकार:-

"जब रक्षक ही भक्षक बन जाए और बजट के नाम पर गौशालाओं को तरसाया जाए, तो जनता चुप नहीं बैठेगी। सरकार तुरंत 1120 करोड़ जारी करे, वरना विधानसभा से लेकर सड़कों तक इस अन्याय के खिलाफ युद्ध छिड़ेगा।"

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