गौशाला में मौनी बाबा की पुण्य स्मृति पर आयोजित कार्यक्रम, चादर रस्म को लेकर ग्रामवासियों ने जताई आपत्ति।
By Shubh Bhaskar ·
22 Feb 2026 ·
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गौशाला में मौनी बाबा की पुण्य स्मृति पर आयोजित कार्यक्रम, चादर रस्म को लेकर ग्रामवासियों ने जताई आपत्ति।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- माचाड़ी-प्राचीन काल में अलवर जिले की राजधानी रहे माचाड़ी कस्बे के वनखंडी महादेव पर स्थित सार्वजनिक गौशाला एवं आश्रम परिसर में दिनांक 17 फरवरी 2026 को परम श्रद्धेय रामदास जी महाराज उर्फ मौनी बाबा की पुण्य स्मृति में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ज्ञात हो कि मौनी बाबा का देहावसान 30 जनवरी 2026 को हुआ था। उनके ब्रह्मलीन होने के उपरांत ग्रामवासियों एवं भक्तजनों द्वारा हवन-पूजन एवं भंडारे का आयोजन किया गया, जिसे ग्राम समाज ने सराहनीय बताया।
ग्रामवासियों का कहना है कि समस्त ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं का यह नैतिक दायित्व था कि वे बाबा को श्रद्धासुमन अर्पित करें, जिसे पूरे श्रद्धाभाव से निभाया गया।
हालांकि कार्यक्रम के दौरान कुछ संतों द्वारा रामकृष्ण दास महाराज को चादर ओढ़ाकर उन्हें मौनी बाबा का शिष्य घोषित किए जाने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्राम के लगभग 90 प्रतिशत लोगों ने इस चादर रस्म पर आपत्ति जताते हुए इसे अनुचित बताया है। ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्णय ग्रामसभा की सहमति के बिना लिया गया,जो उचित प्रक्रिया के अनुरूप नहीं है।
ग्रामीणों के अनुसार लगभग 10 वर्ष पूर्व मौनी बाबा को ग्राम गुर्जरवास में गौ सेवा समिति के अध्यक्ष लालाराम शर्मा व राघव मुनि बाबा एवं अन्य ग्रामवासियों द्वारा यहां लाया गया था। इससे पूर्व वनखंडी महादेव पर कैलाश नाथ महाराज ने लगभग 10 वर्षों तक गौशाला का संचालन किया था तथा बाद में राघव मुनि महाराज ने भी सेवा दी।
ग्रामीणों का स्पष्ट मत है कि यह आश्रम और गौशाला प्रारंभ से ही सार्वजनिक रही है और किसी एक संत या व्यक्ति का स्थायी आधिपत्य कभी नहीं रहा। गौशाला समिति का पंजीकरण संख्या 183/2006-07 के अंतर्गत विधिवत पंजीकृत होना भी इसकी सार्वजनिक प्रकृति को दर्शाता है।
ग्रामवासियों ने आरोप लगाया कि कुछ प्रभावशाली संत एवं व्यक्तियों द्वारा चादर रस्म के माध्यम से आश्रम पर अधिकार या कब्जे की मंशा जताई जा रही है, जिसे ग्राम समाज स्वीकार नहीं करेगा। उनका कहना है कि आश्रम सभी संतों एवं श्रद्धालुओं के लिए खुला है, जहां कोई भी किसी भी संप्रदाय का संत सेवा-भजन कर सकता है, परंतु किसी प्रकार का स्थायी कब्जा या आधिपत्य स्वीकार्य नहीं होगा।
ग्रामवासियों ने 17 फरवरी 2026 को संपन्न हुई चादर रस्म का औपचारिक रूप से खंडन करते हुए कहा कि भविष्य में इस प्रकार के किसी भी निर्णय से पूर्व ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य रूप से ली जानी चाहिए, जिससे आश्रम की सार्वजनिक परंपरा और सामूहिक भावना बनी रहे। इस अवसर पर गौशाला समिति के अध्यक्ष लालाराम शर्मा,पप्पू राम सैनी,रामस्वरूपसैनी, रामकिशोर मीणा,हजारीलाल योगी,मथुरा प्रसाद शर्मा,सूरज सिंह,बाबूलाल सैनी,रमेश चंद यादव,महेश बैरवा,रामखिलारी धाकड़,महेश चंद योगी,सुभाष शर्मा,जगदीश गिरी गोस्वामी, कमल कोली,पंडित अशोक शर्मा,रामबाबू शर्मा,संस्कार सैन, बृजवासी गौ रक्षक सेना के प्रदेश सचिव सुरेश पुजारी सहित काफी संख्या में गौ भक्त व गौसेवकों ने विरोध प्रकट किया है।