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राजस्थान का अद्भुत गांव: जहां 1100 वर्ष पुराने 52 शिवलिंग आज भी आस्था के केंद्र

By Shubh Bhaskar · 15 Feb 2026 · 18 views
राजस्थान का अद्भुत गांव: जहां 1100 वर्ष पुराने 52 शिवलिंग आज भी आस्था के केंद्र


राजस्थान के उदयपुर जिले की फलासिया तहसील के निकट स्थित बिछीवाड़ा गांव केवल एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और संस्कृति की जीवित धरोहर है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यह गांव विशेष रूप से चर्चा में रहता है, क्योंकि यहां स्थित लगभग 1100 वर्ष पुराने 52 शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए अद्वितीय आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
जनश्रुतियों और स्थानीय इतिहास के अनुसार, किसी प्राचीन आपदा के बाद गांव की रक्षा और शांति के लिए एक साथ 52 शिवलिंगों की स्थापना की गई थी। इन शिवलिंगों का आकार सामान्य शिवलिंगों से बड़ा है, जिनमें से कई पांच से छह फीट तक लंबे बताए जाते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि यह स्थल कभी एक महत्वपूर्ण साधना और पूजा का केंद्र रहा होगा।
इतिहास के पन्नों में दर्ज कथाओं के अनुसार यह क्षेत्र कभी ‘विजयपुर पाटन’ के नाम से जाना जाता था। समय के साथ प्राकृतिक आपदाओं और परिस्थितियों ने इस क्षेत्र की संरचना को बदला, लेकिन शिवलिंगों की उपस्थिति आज भी उस गौरवशाली अतीत की साक्षी है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रियासत काल में यहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते थे।
महाशिवरात्रि के अवसर पर बिछीवाड़ा का वातावरण पूर्णतः शिवमय हो उठता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ 52 शिवलिंगों पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ पड़ती है। भजन-कीर्तन, मंत्रोच्चार और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा क्षेत्र गूंज उठता है। ग्रामीणों के अनुसार, इस दिन यहां दर्शन मात्र से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
हालांकि, यह भी एक सच्चाई है कि संरक्षण के अभाव में कई शिवलिंग और आसपास की ऐतिहासिक संरचनाएं जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी हैं। समय के साथ कई स्थानों पर क्षरण और उपेक्षा के कारण मूल स्वरूप प्रभावित हुआ है। इतिहास प्रेमियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इतने महत्वपूर्ण पुरातात्विक और धार्मिक स्थल का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
बिछीवाड़ा के 52 शिवलिंग केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। यह गांव हमें याद दिलाता है कि हमारे ग्रामीण अंचलों में ऐसी अनेक धरोहरें छिपी हैं, जिन्हें पहचानने और संरक्षित करने की आवश्यकता है।

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