माचाड़ी में प्राचीन धरोहरों के जीर्णोद्धार की मांग, ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार!
By Shubh Bhaskar ·
12 Feb 2026 ·
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माचाड़ी में प्राचीन धरोहरों के जीर्णोद्धार की मांग,
ग्रामीणों ने सरकार से लगाई गुहार!
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-माचाडी- प्राचीन काल में अलवर जिले की राजधानी रहे ऐतिहासिक कस्बे माचाड़ी में स्थित प्राचीन धरोहरों के संरक्षण एवं जीर्णोद्धार को लेकर ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है। क्षेत्र में कुछ ऐतिहासिक धरोहरों के मरम्मत कार्य चल रहे हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण स्थल अभी भी उपेक्षा और समय की मार झेल रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार बावन देव जी महाराज का मंदिर, दाऊजी महाराज का मंदिर सहित कई प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरें जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी हैं, जिनके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है। इस संबंध में बडगुर्जर राजपूत राजाओं एवं तत्कालीन अलवर रियासत के राजपुरोहित खानदान के वास्तविक वंशज तथा वर्तमान मुखिया श्री शिवदत्त शर्मा (पुत्र श्री राधा दामोदर शर्मा), सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक एवं ब्राह्मण समाज अध्यक्ष माचाड़ी, ने समस्त ग्रामवासियों के साथ सरकार से इन धरोहरों के संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग उठाई है।
श्री शिवदत्त शर्मा ने बताया कि ये धरोहरें क्षेत्र की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि बावन देव जी महाराज मंदिर के खंभों पर उकेरी गई मूर्तियां प्राचीन शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण हैं, जिनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
ग्रामीणों ने दाऊजी महाराज मंदिर तक सड़क निर्माण की मांग भी उठाई है, ताकि श्रद्धालुओं और ग्रामीणों को आवागमन में सुविधा मिल सके। इसके साथ ही माचाड़ी किले में स्थित भौमिया जी महाराज (बडगुर्जर भौमिया जी) मंदिर की पुनः स्थापना कराने की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों ने महान योद्धा सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य (हेमू) की जन्मभूमि माचाड़ी में उनका स्मारक बनाने की भी मांग रखी है, जिससे क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और गौरव को संरक्षित किया जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से वंचित रह जाएंगी।