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श्री हनुमान जी महाराज की मातृ शिक्षा की दी जानकारी : *गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने*

By Shubh Bhaskar · 10 Feb 2026 · 32 views
श्री हनुमान जी महाराज की मातृ शिक्षा की दी जानकारी : *गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- मथुरा- ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र संत धर्म दास महाराज ने श्री हनुमान जी महाराज की मातृ शिक्षा का महत्व बताते हुए कहा कि बालक के जीवन पर सबसे अधिक प्रभाव उसकी माता के संस्कारों और शिक्षा का पड़ता है। उन्होंने यह ज्ञान गौ पुत्र यादविन्द्र कुमार को देते हुए कहा कि आदर्श माताएँ अपने पुत्र को श्रेष्ठ, साहसी और आदर्श व्यक्तित्व प्रदान करती हैं, जिसका उल्लेख पुराणों और इतिहासों में भी मिलता है।
उन्होंने बताया कि हनुमान जी की माता अंजना देवी अत्यंत सदाचारिणी, तपस्विनी और गुणों से सम्पन्न आदर्श माता थीं। उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए कठोर तप किया और हनुमान जी के पालन-पोषण एवं चरित्र निर्माण में विशेष ध्यान दिया। अंजना देवी बालक हनुमान को वीरता, धर्म और आदर्श जीवन की प्रेरणा देती थीं तथा उन्हें पुराणों और महापुरुषों की कथाएँ सुनाकर श्रेष्ठ मार्ग पर चलने की शिक्षा देती थीं।
गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने बताया कि माता अंजना श्रीराम कथा सुनाकर बालक हनुमान के मन में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाती थीं। श्रीराम कथा सुनते-सुनते हनुमान जी भाव-विभोर हो जाते थे और स्वयं भी श्रीराम की सेवा करने का संकल्प लेते थे। माता अंजना उन्हें बल, पराक्रम और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती थीं।
उन्होंने कहा कि बार-बार श्रीराम कथा सुनने और स्मरण करने से हनुमान जी का मन प्रभु श्रीराम की भक्ति में लीन होता गया। यही मातृ संस्कार उन्हें अतुलित बल, ज्ञान और भक्ति का प्रतीक बनाते हैं।
इस अवसर पर गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को अच्छे संस्कार, धार्मिक शिक्षा और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का आह्वान किया।
अंत में उन्होंने श्री हनुमान जी महाराज की स्तुति करते हुए कहा—
अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहंदनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्।सकलगुणनिधानं वानराणामधीशंरघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि।

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