ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) द्वारा बैंक और बीमा क्षेत्र के श्रमिक संगठनों के साथ एक जुटता व्यक्त करती है।
By Shubh Bhaskar ·
22 Dec 2025 ·
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ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) द्वारा बैंक और बीमा क्षेत्र के श्रमिक संगठनों के साथ एक जुटता व्यक्त करती है।
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):-अलवर- अलवर ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) द्वारा बैंक और बीमा क्षेत्र के श्रमिक संगठनों के साथ एकजुटता व्यक्त करती है।
ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (AITUC) बैंक और बीमा क्षेत्र के उन ट्रेड यूनियनों के साथ अपनी अडिग एकजुटता व्यक्त करती है, जो देशभर में बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% करने वाले बीमा संशोधन विधेयक के विरोध में विरोध-प्रदर्शन कर रही हैं।
AITUC संसद के दोनों सदनों से पारित “सबका बीमा, सबकी रक्षा (बीमा कानूनों का संशोधन) विधेयक, 2025” की कड़ी निंदा करती है और इसे राष्ट्र-विरोधी तथा जन-विरोधी करार देती है। यह विधेयक बीमा क्षेत्र के लिए अत्यंत अशुभ संकेत देता है और इसके बीमा अर्थव्यवस्था पर गंभीर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस विधेयक का मूल भाव और उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था या पॉलिसीधारकों के हितों से नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय पूंजी और वैश्विक बीमा दिग्गजों की मांगों से संचालित है। बीमा क्षेत्र राष्ट्रीय बचत, दीर्घकालिक निवेश और सामाजिक सुरक्षा का एक रणनीतिक स्तंभ है। 100% विदेशी स्वामित्व की अनुमति देना संप्रभु दायित्व से जान बूझकर पीछे हटना है, जिससे भारतीय जनता की कड़ी मेहनत से अर्जित बचत को वैश्विक पूंजी की सट्टेबाज़ी और मुनाफ़ाखोरी की प्रवृत्ति के हवाले कर दिया जाएगा। यह संशोधन वैश्विक बीमा बाज़ार की मांगों के सामने आर्थिक आत्मसमर्पण है। यह कानून बीमा की सामाजिक और विकासात्मक भूमिका से पूर्ण विचलन को दर्शाता है और उसे वैश्विक मुनाफ़ाखोरी के लिए मात्र एक बाज़ारू वस्तु में बदल देता है।
AITUC चेतावनी देती है कि पूर्ण लाभ प्रत्यावर्तन (प्रॉफिट रिपैट्रिएशन) के साथ FDI का परिणाम राष्ट्रीय संपदा की निकासी के रूप में सामने आता है। AITUC यह भी रेखांकित करती है कि बीमा क्षेत्र में FDI की पूर्व बढ़ोतरी से कोई सकारात्मक आर्थिक परिणाम नहीं निकले, सिवाय इसके कि निजी और विदेशी बीमा कंपनियों को लाभ हुआ। इससे सरकार के दावों की असत्यता और खोखलापन उजागर होता है। AITUC अंतरराष्ट्रीय अनुभवों की याद दिलाती है, जो पूर्ण विदेशी स्वामित्व के ख़तरों के प्रति चेतावनी देते हैं—जहाँ सुरक्षा से अधिक मुनाफ़े को प्राथमिकता दी जाती है।
यह दावा कि 100% FDI से बीमा की पहुँच या दक्षता में सुधार होगा, एक खतरनाक मिथक है। वास्तव में इससे सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा संस्थाओं के माध्यम से दशकों में व्यवस्थित रूप से संचित भारतीय घरेलू बचत की संस्थागत लूट का रास्ता खुलेगा। AITUC वैश्विक बीमा पूंजी के दबावों के आगे झुकने के लिए भाजपा सरकार की कड़ी भर्त्सना करती है। यह नीति- निर्णय वैश्विक—विशेषकर अमेरिकी—बीमा दिग्गजों की ज़रूरतों से प्रेरित है और राष्ट्रीय हितों की बलि देता है।
यह विधेयक मौजूदा नीतिगत व्यवस्था के वर्ग-चरित्र को उजागर करता है, जो निरंतर राष्ट्रीय हित, सार्वजनिक संस्थानों और श्रमिकों के ऊपर कॉरपोरेट और विदेशी पूंजी को तरजीह देता है। यह व्यापक नव- उदारवादी एजेंडे का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य मुनाफ़े का निजीकरण,जोखिमों का सामाजिककरण और संगठित श्रम को कमजोर करना है।
AITUC दृढ़ता से यह प्रतिपादित करती है कि बीमा कोई बाज़ारू वस्तु नहीं, बल्कि एक सामाजिक आवश्यकता है, और इसे जनता के हित में संरक्षित करना राज्य का कर्तव्य है। इस क्षेत्र को विदेशी पूंजी के हवाले करना आर्थिक रूप से लापरवाह और राजनीतिक रूप से अक्षम्य है।
AITUC इस विधेयक की तत्काल वापसी की मांग करती है। साथ ही, बीमा क्षेत्र के रणनीतिक और सामाजिक महत्व को देखते हुए, AITUC यह भी दोहराती है कि सरकार मौजूदा बीमा कानूनों में ऐसे संशोधन करे, जिनसे सार्वजनिक क्षेत्र के बीमा को संरक्षित और सुदृढ़ किया जा सके।
AITUC देशभर में अपने समस्त कैडर और कार्यकर्ताओं से आह्वान करती है कि वे बैंक और बीमा क्षेत्र के यूनियनों द्वारा दिए गए आंदोलन के आह्वान का समर्थन करें। हम सभी लोकतांत्रिक शक्तियों और समाज के सभी देशभक्त वर्गों से आग्रह करते हैं कि वे इस राष्ट्र-विरोधी नीति के खिलाफ एकजुट हों और बीमा तथा बैंक कर्मचारियों के जारी संघर्षों को पूर्ण समर्थन दें।
बैंक और बीमा क्षेत्र के संघर्षरत श्रमिकों के साथ एकजुटता में