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धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु को भी करना पड़ा ‘छल’ — *गौ पुत्र धर्म दास महाराज*

By Shubh Bhaskar · 03 Feb 2026 · 42 views
धर्म की रक्षा के लिए भगवान विष्णु को भी करना पड़ा ‘छल’ — *गौ पुत्र धर्म दास महाराज*

*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*

(माचाड़ीअलवर):- मथुरा- ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन द्वारा गौ सेवा एवं सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के तहत धार्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने मंगलवार सुबह करीब 10 बजे गौ पुत्र यदुवेन्द्र कुमार हिन्दू राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी नागपाल शर्मा माचाड़ी को भगवान श्रीहरि विष्णु द्वारा धर्म रक्षा के लिए किए गए विभिन्न लीलाओं का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि ब्रह्मा जी सृष्टि के जन्मदाता, भगवान शिव संहारक तथा भगवान विष्णु जगत के पालनहार माने जाते हैं। जब-जब धर्म और भक्तों पर संकट आया, तब-तब भगवान विष्णु ने लोक कल्याण और धर्म रक्षा के लिए अपनी माया और लीला का सहारा लिया। कई बार इन लीलाओं को ‘छल’ कहा गया,लेकिन उनका उद्देश्य सदैव धर्म की स्थापना और जनकल्याण ही रहा।
*भगवान विष्णु की ०5 प्रमुख लीलाएं*
1.*भस्मासुर का अंत*
धर्म दास महाराज ने बताया कि भगवान शिव से वरदान प्राप्त कर भस्मासुर अत्यंत शक्तिशाली हो गया था और स्वयं शिव जी को ही भस्म करने दौड़ पड़ा। तब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया और भस्मासुर को नृत्य में उलझाकर उसी से उसका हाथ उसके सिर पर रखवा दिया,जिससे वह स्वयं भस्म हो गया।
2.*वृंदा और जलंधर की कथा*
जलंधर नामक असुर अपनी पत्नी वृंदा के सतीत्व के कारण अजेय था। देवताओं की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने जलंधर का रूप धारण कर वृंदा का सतीत्व भंग किया,जिससे भगवान शिव जलंधर का वध कर सके। वृंदा के श्राप के कारण भगवान विष्णु शालिग्राम और वृंदा तुलसी के रूप में पूजित हुईं।
3.*समुद्र मंथन और अमृत वितरण*
समुद्र मंथन से निकले अमृत को जब दैत्यों ने छीन लिया,तब भगवान विष्णु ने पुनः मोहिनी रूप धारण किया। उन्होंने दैत्यों को अपनी सुंदरता में मोहित कर अमृत देवताओं को पिला दिया, जिससे स्वर्ग और देवताओं की रक्षा हो सकी।
4.*वामन अवतार और राजा बलि*
राजा बलि महान दानी थे, लेकिन उनमें अहंकार उत्पन्न हो गया था। भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर उनसे तीन पग भूमि मांगी। दो पग में पृथ्वी और आकाश नाप लिया और तीसरा पग राजा बलि के सिर पर रखकर उन्हें पाताल लोक भेज दिया।भगवान विष्णु स्वयं उनके द्वारपाल बनकर उनके साथ रहने लगे।
5.*बद्रीनाथ धाम की कथा*
महाराज ने बताया कि बद्रीनाथ धाम पहले भगवान शिव और माता पार्वती का निवास स्थान था। भगवान विष्णु ने बालक का रूप धारण कर वहां प्रवेश किया और अंततः वही स्थान अपना धाम बना लिया,जबकि भगवान शिव केदारनाथ चले गए।
धर्म स्थापना ही परम उद्देश्य
गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने कहा कि भगवान का प्रत्येक कार्य, चाहे वह छल के रूप में ही क्यों न प्रतीत हो,अंततः धर्म की रक्षा और लोक कल्याण के लिए ही होता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से गौ सेवा और सनातन धर्म के संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।
जय श्री हरि विष्णु।

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