चारों युगों में गौ माता का अनुपम महत्व बताया गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने!
By Shubh Bhaskar ·
02 Feb 2026 ·
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चारों युगों में गौ माता का अनुपम महत्व बताया गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने!
*नागपाल शर्मा माचाड़ी की रिपोर्ट*
(माचाड़ीअलवर):- मथुरा-
ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्रीराधे ब्रजवासी गौशाला ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने गौ माता के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सनातन संस्कृति में गौ माता का स्थान चारों युगों—सतयुग,त्रेता,द्वापर और कलयुग—में सर्वोच्च रहा है। उन्होंने बताया कि प्राचीन धर्मग्रंथों और पुराणों में गौ माता को देवी स्वरूप माना गया है।
महाराज ने बताया कि सतयुग में गौ माता की उत्पत्ति से जुड़ी अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार गौ माता की उत्पत्ति भगवान श्रीकृष्ण के बाएं अंग से हुई थी। इस दिव्य गौ का नाम सुरभि था, जिनके रोम-रोम से करोड़ों गौवंश उत्पन्न हुए। वहीं एक अन्य मान्यता के अनुसार ब्रह्मा के मुख से निकले फेन से सुरभि गौ की उत्पत्ति हुई। इसके अतिरिक्त समुद्र मंथन के समय भी चौदह रत्नों के साथ गौ माता के प्रकट होने का उल्लेख मिलता है। इन कथाओं से स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति में गौ माता को देवी तुल्य मानकर पूजा जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि त्रेता युग में भी गौ माता का विशेष महत्व रहा। भगवान श्रीराम द्वारा गौ पूजा एवं माता सीता द्वारा गौ सेवा के अनेक प्रसंग शास्त्रों में वर्णित हैं। इस युग में गौ माता की सेवा से पुण्य की प्राप्ति, पापों का नाश तथा आरोग्य लाभ की मान्यता रही। गौ माता का दूध, गोबर और घी पूजा-पाठ में पवित्र माना जाता था।
द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने गोकुल और द्वारिकापुरी में गौ माताओं की सेवा और पूजा कर समाज को गौ संरक्षण का संदेश दिया। गौ माता को 33 करोड़ देवी-देवताओं का वासस्थल माना गया और उनके चरणों में समस्त तीर्थों का निवास बताया गया।
स्वामी गौ पुत्र धर्म दास महाराज ने कहा कि कलयुग में गौ माता का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। इस युग में गौ सेवा, गौ पूजन, हरा चारा खिलाना, परिक्रमा करना एवं गौ माता को स्नान कराना विशेष पुण्यदायी माना गया है। इससे घर में सुख-शांति, समृद्धि और लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।
उन्होंने बताया कि गौ माता के दूध और घी से जहां स्वास्थ्य लाभ मिलता है, वहीं उनकी सेवा से आध्यात्मिक उन्नति भी होती है। कलयुग में गौ माता की पूजा से पापों का नाश और ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है।
इस अवसर पर महाराज ने गौ संरक्षण एवं सेवा को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। उक्त समस्त जानकारी ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र संत धर्मदास महाराज ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी गौ पुत्र नागपाल शर्मा माचाड़ी को दी गई।